रेवाड़ी शहर में एक ऐसा प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि वर्षों से यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्र, अष्टमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। आज से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हुई है और गुप्त नवरात्रि में भी माता के मंदिर में खूब भी उमड़ती है। सिर्फ रेवाड़ी ही नहीं बल्कि दूर-दूर से भक्तों माता के दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की माता भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है जिसके कारण बड़े पैमाने पर भक्ति यहां आते हैं।
100 से 150 साल पुराना बताया जाता है इतिहास
शहर के गुर्जरवाड़ा इलाके में स्थित प्राचीन सिद्ध श्री नगरकोट कांगड़ा वाली माता मंदिर का इतिहास करीब 100 से 150 वर्ष पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर कई पीढ़ियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। समय के साथ मंदिर का स्वरूप बदला, लेकिन यहां की धार्मिक परंपराएं आज भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही हैं।
मनोकामना पूरी होने के बाद रखी गई थी मंदिर की नींव
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, स्वर्गीय मोतीलाल अग्रवाल संतान प्राप्ति की कामना लेकर हिमाचल प्रदेश स्थित माता नगरकोट धाम पहुंचे थे। वहां दर्शन के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने रेवाड़ी लौटकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए इस मंदिर की स्थापना करवाई। तभी से यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते आ रहे हैं।मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम माता की आरती होती है। इसके अलावा भजन-कीर्तन, हवन और विशेष धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूरे परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है।
मन्नत पूरी होने की आस्था ने बनाई अलग पहचान
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा माता के दरबार में धन्यवाद अर्पित करने पहुंचते हैं। कोई रोजगार, कोई परिवार की खुशहाली तो कोई संतान सुख की कामना लेकर यहां आता है। इसी विश्वास ने इस मंदिर को रेवाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में विशेष पहचान दिलाई है।मंदिर परिसर में समय-समय पर धार्मिक आयोजन, भंडारे और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर इन कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। कई समाजसेवी और जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर यहां पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं।













