
रेवाड़ी अलर्ट: रेवाड़ी में मानसून की लगातार बारिश के बीच शहर के कई पुराने और जर्जर भवन लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। नगर परिषद के रिकॉर्ड में 30 से अधिक ऐसे भवन चिन्हित हैं, जिनकी हालत बेहद खराब बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बरसात के दौरान बड़ा हादसा हो सकता है।
दीवारों में दरारें, कमजोर छतें और गिरता प्लास्टर
शहर के कई पुराने मकानों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। कई भवनों की छतें कमजोर हो गई हैं और जगह-जगह से प्लास्टर गिर रहा है। वर्षों से इन भवनों की मरम्मत नहीं होने के कारण इनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, संघी का बास और चौधरीवाड़ाचौधरीवाड़ा सहित कई पुराने मोहल्लों में ऐसे भवन मौजूद हैं। इनमें कुछ मकान लंबे समय से बंद पड़े हैं, जबकि कुछ जर्जर भवनों में अब भी लोग रह रहे हैं, जिससे जोखिम और बढ़ गया है।
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ऐतिहासिक इमारतें भी हो रही हैं खस्ताहाल
शहर की वर्षों पुरानी मुक्ति हवेली भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। बारिश के मौसम में इसकी हालत और खराब हो जाती है। वहीं, तीन साल पहले तेज बारिश के दौरान ऐतिहासिक भाड़ावास गेट का एक हिस्सा गिरने की घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है।
नोटिस जारी, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी
नगर परिषद की ओर से भवन मालिकों को नोटिस जारी करने का दावा किया जाता है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि नोटिस के बाद भी अधिकांश मामलों में ध्वस्तीकरण या सुरक्षा संबंधी ठोस कदम नहीं उठाए जाते। इसी वजह से हर मानसून में लोगों की चिंता बढ़ जाती है।
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कैसे होती है कार्रवाई की प्रक्रिया?
किसी जर्जर भवन की शिकायत मिलने पर नगर परिषद का इंजीनियरिंग विभाग मौके का निरीक्षण करता है। इसके बाद रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजी जाती है। अंतिम निर्णय के बाद भवन को सुरक्षित कराने या ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया काफी लंबी खिंच जाती है।
स्थानीय लोगों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
निवासियों का कहना है कि खतरनाक भवनों को तुरंत चिन्हित कर बैरिकेडिंग की जाए और जिन भवनों से जान-माल का खतरा है, उन्हें बिना देरी ध्वस्त कराया जाए। लोगों का मानना है कि लापरवाही की कीमत किसी की जान से नहीं चुकाई जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
मानसून अभी जारी है और लगातार बारिश के बीच जर्जर भवनों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन भवनों को समय रहते सुरक्षित कर संभावित हादसों को रोकना है, ताकि शहर में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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