हरियाणा में सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। गुरुग्राम और झज्जर के बीच प्रस्तावित नए हाईवे के निर्माण की तैयारियां तेज हो गई हैं। करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच सफर को आसान बनाना और रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना है। अधिकारियों के स्तर पर सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है और अब अगले चरण की प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी है।
सर्वे पूरा, अब डीपीआर तैयार करने की तैयारी
हाईवे निर्माण के लिए कराए गए सर्वे में तीन संभावित रूट सामने आए हैं। अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इन विकल्पों का तकनीकी परीक्षण करेगा। जिस रूट को सबसे उपयुक्त माना जाएगा, उसी के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। डीपीआर बनने के बाद परियोजना को निर्माण चरण में ले जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
भूमि अधिग्रहण रहेगा अहम चरण
हाईवे निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सरकारी भूमि पहले से उपलब्ध है, वहां प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रहने की संभावना है। वहीं निजी जमीन वाले हिस्सों में नियमानुसार अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी की जाएगी ताकि परियोजना तय समय में आगे बढ़ सके।
जाम की समस्या से मिलेगी बड़ी राहत
गुरुग्राम और झज्जर के बीच मौजूदा सड़क पर हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं। बढ़ते ट्रैफिक के कारण कई स्थानों पर लंबे समय तक जाम की स्थिति बनी रहती है। नया हाईवे बनने के बाद यात्रा का समय कम होगा और लोगों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम सफर का लाभ मिलेगा।
एम्स और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट पहुंचना होगा आसान
झज्जर के बाढ़सा स्थित एम्स और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) में हरियाणा सहित कई राज्यों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। मौजूदा सड़क पर ट्रैफिक दबाव अधिक होने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाईवे बनने के बाद इन संस्थानों तक पहुंचने में काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
तीन रूट विकल्पों पर चल रहा विचार
सर्वे एजेंसी ने सरकार के सामने तीन संभावित मार्ग सुझाए हैं। एक विकल्प मौजूदा सड़क को चौड़ा कर आधुनिक हाईवे विकसित करने का है। दूसरे विकल्प में गुरुग्राम के हरसरू क्षेत्र से नया मार्ग बनाने का सुझाव दिया गया है, जबकि तीसरे विकल्प में गुरुग्राम-पटौदी रोड के वजीरपुर क्षेत्र से झज्जर तक नया कॉरिडोर तैयार करने की योजना शामिल है। अंतिम निर्णय तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
सरकारी जमीन वाले रूट को मिल सकती है प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार जिस रूट पर अधिक सरकारी भूमि उपलब्ध है, उसे परियोजना के लिए बेहतर माना जा रहा है। इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सरल होगी और निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है। हालांकि अंतिम फैसला एनएचएआई की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।













