Haryana: कैथल: हरियाणा के कैथल की पूंडरी अनाज मंडी में गेहूं खरीद को लेकर इन दिनों जो प्रदर्शन का मुद्दा चरम पर है, उसकी सच्चाई उतनी सीधी नहीं है, जितनी दिखाई जा रही है। एक तरफ भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ज़मीनी जानकारी कुछ अलग ही कहानी बयाँ कर रही है।Haryana
*मुद्दा यह है कि पंजाब और हरियाणा में बारिश के हालातों को देखते हुए, गेहूं में अधिक मात्रा में नमी देखने को मिल रही है और गेहूं चमक विहीन हो गए हैं। इस वजह से खरीदी में देरी बनी हुई है।* एफसीआई ने ग्रीन सैंपल एकत्रित कर लिए हैं और आगे जाँच के लिए एग्रीकल्चर विभाग को पहुँचा भी दिए हैं। अदाणी पूरी तैयारी में है, जैसे ही एफसीआई से आदेश मिलेगा, खरीदी शुरू कर दी जाएगी।Haryana
भले ही अदाणी पर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं और दोषी करार दिया जा रहा है, बावजूद इसके अदाणी अपने दायित्वों को प्रखर रखे हुए है। इसका जीता-जागता उदाहरण अदाणी साइलो के बाहर देखने को मिल रहा है, जहाँ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की दोनों तरफ करीब दो-दो किलोमीटर लंबी कतारें लगी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अदाणी ने ये भी सुनिश्चित किया है कि कैंपस में स्थित अटल कैंटीन के माध्यम से किसानों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था में कोई कमी ना हो| यह इस बात का सबूत है कि हर स्थिति में अदाणी किसान भाइयों के साथ खड़ा है।Haryana
यह समझना भी जरूरी है कि देश में गेहूं की खरीद, भंडारण और वितरण का काम मुख्य रूप से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के जरिए होता है। यानि कब खरीद शुरू होगी, बिक्री कब होगी, कहाँ जाएगी और कैसे होगी, ये सभी फैसले सरकारी प्रक्रिया के तहत ही लिए जाते हैं।Haryana
ऐसे में, बार-बार किसी निजी कंपनी, खासकर अदाणी एग्री के साइलो को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना कई सवाल खड़े करता है। पूंडरी के मामले में भी प्रदर्शन के दौरान यह कहा गया कि अदाणी एग्री ने खरीद शुरू नहीं की, इसलिए देरी हो रही है। लेकिन, असलियत यह है कि खरीद शुरू करने का पूरा सिस्टम सरकार और एफसीआई के हाथ में होता है। फिर हर बार एक ही कंपनी को निशाना क्यों बनाया जाना किसी गहरे षड्यंत्र की तरफ इशारा करता है।
प्रदर्शन की इस गर्मागर्मी के बीच नई व्यवस्था भी किसानों की परेशानी का एक कारण बताई जा रही है। गेट पास के नियम, ट्रैक्टर-ट्रॉली का पंजीकरण और बायोमेट्रिक प्रक्रिया जैसे बदलाव अचानक लागू होने से किसानों को दिक्कत हो रही है। लेकिन, कंपनी की मानें तो इनका उद्देश्य सिस्टम को स्पष्ट और पारदर्शी बनाना है, जिसे समझने में थोड़ा समय लग सकता है, जो कि स्वाभाविक है।Haryana
सबसे बड़ी बात यह सामने आ रही है कि इस विरोध में शामिल सभी लोग असली किसान नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के मुताबिक, कुछ बाहरी लोग अपने निजी फायदे के लिए माहौल को भड़का रहे हैं। इससे असली किसानों की आवाज दब रही है और मुद्दा भटकता नजर आ रहा है।Haryana
सूत्रों के अनुसार, गेहूं की खरीद अगले कुछ दिनों में शुरू होने वाली है। ऐसे में, जरूरी है कि अफवाहों से बचा जाए और सही जानकारी के आधार पर ही राय बनाई जाए। हर बार बिना पूरी सच्चाई जाने किसी एक नाम को घसीटना समाधान नहीं है, बल्कि इससे भ्रम और तूल पकड़ता हैHaryana





















