हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब जर्जर भवनों और असुरक्षित कमरों से जुड़े मामलों में फैसले के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रेवाड़ी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय समिति मौके पर निरीक्षण कर जरूरी निर्णय ले सकेगी।
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे लाखों विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिससे पुराने और जर्जर स्कूल भवनों से जुड़े मामलों का निपटारा पहले की तुलना में काफी तेजी से हो सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रशासनिक देरी भी कम होगी।नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जिले में एक समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) करेंगे। समिति में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अलावा तकनीकी विशेषज्ञ और संबंधित विभागों के इंजीनियर भी शामिल रहेंगे। यह टीम सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेगी और भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। यदि कोई कमरा या भवन उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं पाया जाता है तो उसी स्तर पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जा सकेगा।
रेवाड़ी के स्कूलों पर भी रहेगी नजर
इस फैसले का असर रेवाड़ी जिले पर भी साफ दिखाई देगा। जिले के कई सरकारी स्कूल वर्षों पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। मानसून के दौरान कई बार अभिभावकों की ओर से भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई जाती रही है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे स्कूलों का निरीक्षण तेजी से किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि अभी किसी भी स्कूल का नाम या सूची जारी नहीं की गई है।अब तक किसी भवन को अनुपयोगी घोषित करने और आगे की कार्रवाई के लिए अलग-अलग स्तर पर अनुमति लेनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया में कई बार महीनों लग जाते थे। नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी देरी को खत्म करना है, ताकि छात्रों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में तत्काल फैसला लिया जा सके। इससे शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय भी बेहतर होगा।
नीलामी और रिपोर्ट का अधिकार भी समिति के पास
सरकार ने जिला समिति को केवल निरीक्षण का ही नहीं, बल्कि आवश्यक होने पर संबंधित सामग्री की नीलामी प्रक्रिया पूरी कराने का अधिकार भी दिया है। वहीं जिन स्थानों पर भविष्य में नए कमरों या भवनों के निर्माण की आवश्यकता होगी, उसकी जानकारी संबंधित शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी, ताकि बजट जारी करने की प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके।शिक्षा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है। प्रदेश के सभी जिलों में समय-समय पर स्कूल भवनों का निरीक्षण किया जाएगा और जहां भी सुरक्षा संबंधी कमी मिलेगी, वहां नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।













