हरियाणा गोरक्षा के लिए कोई बडा कानून नहीं है। यही कारण है गौ हत्याए नहीं थम रही है। हर रात बडी संख्या गायें को गोतस्कर उठा ले जाते है तथा उनका वध करते है। पकडे भी जाते है लेकिन कमजोर कानून के चलते दोबारा से वहीं काम शुरू कर देते हैं। यहीं कारण है कि देश में गो माता की कदर नहीं है। गो हत्याएं बढती जा रही है। अब वह समय आ गया है हमे एकजुट होकर गोसम्मान के लिए आगे आना होगा। गोसेवकों ने इसी को लेकर हरियाणा में गो हत्या रोकने के लिए बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। जानिए क्या है योजना
रेवाड़ी शहर में गोसेवकों ने गो सम्मान आभानंदन अभियान के तहत गो हत्या रोकने के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। गो क्रांति गोशाला के प्रधान प्रदीप डागर गो सम्मान आभानंदन कार्यक्रम के तहत पहला चरण को 27 अप्रैल से देश की हर तहसील में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था।
हरियाणा का कानून कमजोर
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा गो हत्या रोकने के लिए लाया गया कानून काफी कमजोर है। अभी तक उसे पूरी तरह से लागू भी नहीं हो पाया है। हम चाहते हैं कि गो हत्या रोकने, गोचारण भूमि खाली करवाने और गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए केंद्र मजबूत कानून लेकर आए। जो पूरे देश में लागू हो। ताकि देश में गो हत्या को रोका जा सके। सरकार ठोस कानून नही बना रही है इसी ये दूसरे चरणा में कदम उठाना पडा है।
बता दे इस मांग को लेकर आंदोलन की शुरूआत 27 अप्रैल से हुई थ्री । 27 अप्रैल को देश की सभी तहसीलों में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। लेकिन अभियान के बावजूद कानून नहीं बनाया गय इसी लिए 27 जुलाई को देश के 780 जिलों में पीएम के नाम जिला उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
16 अगस्त से होगा आंदोलन
मांगे नहीं माने जाने पर अगले साल दिल्ली में 16 अगस्त से पांच साधु-संतों के आमरण अनशन शुरू करेंगे। अब केवल घोषणा से काम नहीं चलेगा। इसे लोकसभा और राज्यसभा में पास भी करना होगा। मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। देश के सभी साधु-संतों ने यह निर्णय लिया है।
नही हुई सुनवाई तो होगा आमरन अनशन
गोसेवकों ने कहा कि यदि केंद्र ने फिर भी हमारी बात नहीं मानी तो 27 अक्टूबर को सभी प्रदेश की राजधानी में मख्यमंत्रियों के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश की राजधानियों में प्रदर्शन के बाद भी बात नहीं बनी तो अगले साल 27 फरवरी से दिल्ली में एकत्रित होंगे। जहां 15 अगस्त तक साढ़े पांच माह तक धरना दिया जाएगा। यदि फिर भी बात नहीं बनी तो 16 मार्च से मांगें माने जाने तक देश के पांच साधु संत अन्न-जल त्यागकर आमरण अनशन शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तीनों मांगें माने जाने तक जारी रहेगा।














