हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में वाहन चलाने वालों के लिए अक्टूबर से एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। राज्य सरकार प्रदूषण नियंत्रण नियमों को और सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वैध नहीं होगा, तो पेट्रोल पंप पर ईंधन मिलने में परेशानी हो सकती है। इसके लिए सभी पेट्रोल पंपों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा ताकि नियमों का पालन स्वतः सुनिश्चित हो सके।
क्या है सरकार की नई योजना और क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें समय पर प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रेरित करना है। इसी वजह से अब पेट्रोल पंपों पर ऐसी तकनीक लगाई जा रही है, जो वाहन का PUC स्टेटस कुछ ही सेकंड में जांच सकेगी। इससे प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन और अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगा।
कैसे काम करेगी नई हाईटेक व्यवस्था?
नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। वाहन जैसे ही फ्यूल स्टेशन पर पहुंचेगा, कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन करेगा और जानकारी सीधे सरकारी वाहन डेटाबेस से मिलाई जाएगी। यदि PUC प्रमाणपत्र वैध होगा तो ईंधन मिलेगा, जबकि प्रमाणपत्र समाप्त होने या उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में सिस्टम ईंधन देने से रोक सकता है।
कब तक सभी पेट्रोल पंपों पर लग जाएगी यह तकनीक?
सरकार ने सितंबर के अंत तक हरियाणा एनसीआर के सभी पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे लगाने का लक्ष्य तय किया है। इसकी शुरुआत अगस्त में फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जैसे जिलों से होगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों के पेट्रोल पंपों पर भी यह तकनीक स्थापित की जाएगी, ताकि 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सके।यह नियम निजी और व्यावसायिक दोनों तरह के वाहनों पर लागू होगा। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले सभी वाहनों के लिए वैध PUC प्रमाणपत्र अनिवार्य रहेगा। यानी बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र के किसी भी वाहन को राहत नहीं मिलेगी।
PUC नहीं होने पर कितना हो सकता है नुकसान?
यदि किसी वाहन का PUC प्रमाणपत्र वैध नहीं है, तो मोटर वाहन नियमों के तहत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों को ईंधन भरवाने में भी दिक्कत आ सकती है। ऐसे में समय रहते PUC का नवीनीकरण कराना बेहद जरूरी होगा।राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने के लिए इस तरह की व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। दिल्ली में इस दिशा में पहले से कदम उठाए जा चुके हैं, जबकि हरियाणा के साथ उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है।














