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रेवाड़ी (Best24News)। जिला बार एसोसिएशन रेवाड़ी का उपमंडल अधिकारी (SDM) सुरेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। धरना प्रदर्शन के बीच सूचना आई कि प्रशासन ने एसडीएम सुरेश को छुट्टी पर भेजकर उनकी जगह सीटीएम (CTM) को कार्यभार सौंपा है। हालांकि, अधिवक्ताओं ने इसे स्वीकार नही किया। कहा कि जब तक एसडीएम का स्थाई तबादला और उनके फैसलों की जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन और धरना जारी रहेगा।

आईजीयू छात्र संगठन और बीजेपी जिलाध्यक्ष पहुंचीं धरना स्थल
वकीलों के इस प्रदर्शन को जनसमर्थन भी मिलने लगा है। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (IGU) मीरपुर के छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर वकीलों को अपना समर्थन दिया। दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष वंदना पोपली भी धरना स्थल पर अधिवक्ताओं के बीच पहुंचीं। उन्होंने वकीलों को आश्वासन दिया कि वे न केवल एसडीएम का तबादला करवाएँगी, बल्कि उनके द्वारा दिए गए संदिग्ध निर्णयों की निष्पक्ष जांच भी होगी। उन्होंने शीघ्र ही वकीलों के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का भी भरोसा दिया।

8 एकड़ की कीमती जमीन के फैसले में पक्षपात का आरोप
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान विश्वामित्र यादव ने धरना स्थल से एसडीएम की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने गढ़ी अलावलपुर गांव के एक विवादित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एसडीएम ने एक बड़े नेता को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रामीणों के हितों के विपरीत फैसला सुनाया।
प्रधान ने बताया कि यह लगभग 8 एकड़ की बहुमूल्य जमीन का मामला है जो लंबे समय से विवादित है। जब तहसीलदार ने इस फैसले का इंतकाल चढ़ाने से मना कर दिया, तो एसडीएम ने दबाव बनाकर इंतकाल चढ़वाया, जबकि मामला कमिश्नर की अदालत में विचाराधीन है। वकीलों ने आरोप लगाया कि एसडीएम के खिलाफ हांसी में भी एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसमें गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। भष्ट्राचार कें संलिप्त को लेकर सरकार गंभीर क्यों नहीं है।

ये रहे मौजूद, की नारेबाजी
धरना स्थल पर पूर्व प्रधान एवं पूर्व जिला प्रमुख सतीश यादव, एस.एन. वशिष्ठ, अमरजीत यादव, डी.पी. नंदवानी, मोनू राव, मुकेश रंगा, नरेश कुमार यादव, अमर सिंह यादव, ललिता भारती, भाग्येश यादव, सौरभ राव, राजकुमार गेरा, निगेश शर्मा, अश्वनी तिवारी, त्रिलोक चंद, अनिल अत्री, उपाध्यक्ष सुमन यादव, सचिव मनोज कुमार, सहसचिव मोनू, कोषाध्यक्ष चिराग शर्मा सहित सैकड़ों वकीलों ने प्रशासनिक रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।













