शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर फिर आफत: मानसून सक्रिय होते ही जलभराव और जाम, NHAI की बड़ी लापरवाही आई सामने

Written by: हर्ष चौहान

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धारूहेड़ा/गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बार फिर बड़ी मुसीबत खड़ी होने वाली है। मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ ही हाईवे…


दिल्ली-जयपुर हाईवे पर फिर आफत
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर फिर आफत
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धारूहेड़ा/गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बार फिर बड़ी मुसीबत खड़ी होने वाली है। मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ ही हाईवे पर गंभीर जलभराव और कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम का खतरा मंडराने लगा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की घोर लापरवाही के कारण समय रहते नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई नहीं कराई गई, जिससे स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

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​हर साल दावे केवल कागजों में ही सिमटै”

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर फिर आफत
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर फिर आफत

जब भी मानसून समय हाईवे पर जाम लगता है तो एचएचएआई के अधिकारी दावा करते है अभी नया काम जारी है अगले साल यह समस्या नही आयेगी। लेकिन हर साल जलभराव व जाम की समस्या बरकरार है। कारण साफ है विभाग की योजना सही नही है। जब विरोध होता है तब जाकर काम किया जाता है। अगर समय रहते कात होता तो ये समस्याएं नहीं आती।

पहली बारिश ने ही खोल दी थी पोल

दिल्ली-एनसीआर में मानसून की पहली तेज बारिश ने तबाही मचा दी थी। भारी जलभराव के बीच दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया है, जिससे हीरो होंडा चौक से खेड़की दौला टोल तक भयंकर जाम लग गया है। गुरुग्राम में भी नरसिंहपुर से राजीव चौक तक करीब 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लगा हुआ है। मौसम विभाग ने रेड और येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

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हाईवे के दोनों ओर बनी खुली ड्रेन (नालियों) में भारी मात्रा में कचरा और गाद जमा है। कई संवेदनशील स्थानों पर जल निकासी का पूरा जिम्मा केवल अस्थायी पंपों के भरोसे छोड़ दिया गया है। ऐसे में यदि तेज बारिश होती है, तो सिरहौल बॉर्डर से लेकर खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक वाहनों का पहिया थमना तय माना जा रहा है।

नरसिंहपुर बना सबसे बड़ा ‘डेंजर ज़ोन’, NHAI अधिकारी मौन

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर गुरुग्राम का नरसिंहपुर क्षेत्र सबसे संवेदनशील और खतरनाक जलभराव प्वाइंट बना हुआ है। यहाँ हल्की बारिश में ही सर्विस लेन के साथ-साथ मुख्य हाईवे तक कई फीट बरसाती पानी भर जाता है। हर वर्ष यहाँ अस्थायी पंपों के जरिए पानी निकालने की औपचारिकता की जाती है, लेकिन तेज वर्षा के दौरान यह जुगाड़ पूरी तरह फेल हो जाता है।

इस गंभीर लापरवाही के संबंध में जब एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेश तिलक को फोन किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह कोई जवाब नहीं दिया।

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एक नजर में हाईवे की बदहाली

  • 10 किलोमीटर हिस्सा: हीरो होंडा चौक से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक सबसे ज्यादा खराब और बदहाल स्थिति है।
  • 20 किलोमीटर तक जाम: बारिश के दौरान जलभराव होने पर जाम की कतार 20 किमी तक पहुंच जाती है, जिससे दिल्ली, गुरुग्राम, मानेसर और जयपुर के लाखों यात्री घंटों फंसे रहते हैं।
  • अधूरे इंतजाम: पिछले वर्ष 750 मीटर नई ड्रेन को हाईवे की ड्रेन से जोड़ा गया था और ट्रेंचलेस तकनीक से 3 पाइपों को कनेक्ट किया गया था, लेकिन धरातल पर सब बेअसर साबित हो रहा है।

हर कदम पर लापरवाही: 7 साल पुराना गड्ढा आज तक नहीं हुआ ठीक

हाईवे की यह बदहाली एनएचएआई की तैयारियों और कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। गत सात जुलाई को हुई बारिश के कारण हाईवे की एक लेन पर बड़ा गड्ढा हो गया था। वहीं, हीरो होंडा चौक फ्लाईओवर पर करीब सात वर्ष पहले बना एक बड़ा गड्ढा आज तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया जा सका है। इसके कारण मानेसर से गुरुग्राम की ओर आने वाली एक पूरी लेन लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे रोजाना हजारों वाहन रेंगने को मजबूर हैं।

नालों की सफाई अधूरी और मानसून में याद आया निर्माण कार्य!

हाईवे के दोनों किनारों पर सुरक्षा के लिहाज से बाक्स ड्रेन के बजाय असुरक्षित खुली नालियां बनाई गई हैं, जिनमें गाद भरी पड़ी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मानसून शुरू होने के बाद भी कई स्थानों पर आरसीसी सर्विस लेन का निर्माण कार्य कछुआ गति से जारी है। बारिश के मौसम में चल रही यह निर्माण गतिविधियां जल निकासी के रास्ते को रोक रही हैं और यातायात के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही हैं। इसके अलावा, नरसिंहपुर क्षेत्र में एक कलवर्ट की सफाई के लिए करीब एक वर्ष पहले खोदा गया गड्ढा आज तक नहीं भरा गया, जिससे हादसों का शिकार होने का डर बना हुआ है।

नियमों की धज्जियां: प्रतिबंध के बाद भी दौड़ रहे ऑटो और बाइक

हाईवे पर सुरक्षा कारणों से ऑटो रिक्शा और दोपहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद एक्सप्रेसवे के मुख्य लेन पर ये वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। वर्षा के दौरान विजिबिलिटी कम होने से इनके कारण बड़ी दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन मानसून से पहले नालों की सफाई करवा देता और सर्विस लेन का काम पूरा कर लेता, तो जनता को हर साल इस नारकीय स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता।

हर्ष चौहान
About the Author हर्ष चौहान

हर्ष चौहान Best24News के लिए रेवाड़ी जिले की खबरें कवर करते हैं। वे जिले के शहर और गाँवों से जुड़े स्थानीय मुद्दे, प्रशासन के फैसले, विकास कार्य, शिक्षा और आम लोगों से जुड़ी खबरें पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि रेवाड़ी की हर ज़रूरी खबर तथ्यों की जाँच के साथ सबसे पहले आप तक पहुँचे। View all posts by हर्ष चौहान →

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