धारूहेड़ा: भिवाड़ी में अलवर बाइपास पर जमा हो रहे काले पानी की निकासी के लिए अब भिवाड़ी ने नया पैतरा अपना लिया है। मार्डन स्कूल के पास पक्की पाईप लाईन दबाकर नाले को जोड दिया है। ऐसे में अब धीरे धीरे काला पानी बजरंग नगर से होते हुए धारूहेड़ा पहुंच रहा है। अब ये काला पानी बजरंग नगर, एमटूसोसायटी व बेस्टेक रोड पर दो दो फुट जलभराव हो रहा है। मजबूरन में धारूहेड़ा के लोगों को पानी के अंदर से गुजरना पड रहा है।

एक साल में चार बार शिकायत: रोजाना आ रहे काले पानी को लेकर नपा के चेयरमैन अजय जांगडा, एम2के सोसायटी के प्रधान सुरेंद्र शर्मा, धर्मपाल, पार्षद डीके शर्मा, त्रिलोक धारीवाल की ओर से एक साल में चार जलभराव को लेकर शिकायत की जा चुकी है। लेकिन भिवाड़ी से लगातार काला पानी धारूहेड़ा पहुंच रहा है। बता दें कि लगातार आने वाले प्रदूषित पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। प्रदूषित पानी के कारण क्षेत्र में जल प्रदूषण और जलभराव की समस्या गंभीर होती रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भिवाड़ी से छोड़ा जाने वाला गंदा पानी धारूहेड़ा-भिवाड़ी बाईपास के आस-पास से होते हुए हरियाणा सीमा में प्रवेश कर रहा हैं। जलभराव को ले सोहना पलवल हाईवे पर आवागमन ठप पडा हुआ है। इसको लेकर कई बार बैठक हो चुकी है लेकिन केवल कागजों में ही योजना बनाई गई है। धरातल पर कोई समाधान नहीं हो पा रहा है।
रैंप बनने के मिली थी राहत: पिछले कई सालो से भिवाड़ी से छोड़ा जाने वाला गंदा पानी धारूहेड़ा-भिवाड़ी बाईपास के आस-पास से होते हुए हरियाणा सीमा में प्रवेश करता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के धारूहेड़ा दौरे के दौरान बाईपास पर पानी के तेज बहाव को रोकने के लिए रैंप का निर्माण कराया गया था। इसके बाद धारूहेड़ा की ओर प्रदूषित पानी का बहाव काफी हद तक रुक गया। भिवाड़ी की तरफ से गंदा पानी छोड़े जाने की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भिवाड़ी बाईपास के साथ लगते एक निजी स्कूल के पीछे से अभी भी प्रदूषित पानी हरियाणा की सीमा में धारूहेड़ा की ओर छोड़ा जाता है। इस मामले में कार्रवाई की मांग लंबे समय से उठती रही है।धारूहेड़ा में भिवाड़ी से आने वाले प्रदूषित पानी को लेकर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शिकायत पर सेक्टर-6 थाना धारूहेड़ा में मामला दर्ज किए जाने की बात भी सामने आ चुकी है।

प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से भी संबंधित पक्षों पर करोड़ों रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। लेकिन लंबे समय से जलभराव की समस्या को लिए धारूहेड़ा-भिवाड़ी बाईपास पर जलभराव के बीच लोगों की आवाजाही के लिए मिट्टी डलवाकर अस्थायी रास्ता तैयार कराया गया है। इस रास्ते से मोटरसाइकिल और पैदल आने-जाने वाले लोगों को राहत मिल गई है। अब देखना यह है ये कब तक बना रहेगा। जैसे पानी का बहाव तेज होगा ये मार्ग फिर से खराब हो सकता है।













