धारूहेड़ा में मानसून की बारिश के बाद नगर पालिका की नाला सफाई व्यवस्था एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। कई इलाकों में बारिश का पानी समय पर नहीं निकलने से जलभराव और गंदगी की समस्या सामने आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून से पहले नालों की सफाई के दावे तो किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं दिया। बारिश थमने के बाद कई स्थानों पर नालों से निकली गंदगी सड़कों तक पहुंच गई, जिससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ी।
सफाई कार्य पर खर्च को लेकर पारदर्शिता की उठी मांग

कस्बे के बास रोड समेत कई क्षेत्रों के निवासियों ने नाला सफाई कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई, लेकिन कई नालों में अब भी कचरा और गाद जमा है। लोगों का आरोप है कि यदि समय पर प्रभावी सफाई होती तो बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था इतनी प्रभावित नहीं होती। अब नागरिकों ने प्रशासन से पूरे कार्य का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

स्थायी समाधान की मांग, हर मानसून में दोहराई जा रही समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव और गंदगी की स्थिति बनना यह दर्शाता है कि समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। नागरिकों ने प्रशासन से नियमित निगरानी, समयबद्ध सफाई और गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जलभराव के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। लोगों का मानना है कि केवल कागजी दावों के बजाय जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई देने चाहिए, ताकि मानसून के दौरान ऐसी परेशानी दोबारा न हो।












