रेवाड़ी के 7 पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज, रेवाड़ी/भिवाड़ी क्षेत्र की एक रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी (RWA) में कथित दस्तावेजी हेराफेरी का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। अदालत के निर्देश के बाद सोसाइटी के सात पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
आरोप है कि नई कार्यकारिणी का गठन और उसका पंजीकरण कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, हस्ताक्षरों की नकल की गई और बैठकों के रिकॉर्ड में बदलाव कर सहकारिता विभाग में प्रस्तुत किया गया। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
जानकारी के अनुसार, ओमेक्स ग्रीन मिडोसिटी रेजीडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी के पूर्व मंत्री एवं सचिव अजीत सिंह ने पूरे मामले को लेकर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद दायर किया था। शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए गए, जिन पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद संबंधित सात पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने का लगाया आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके पद से इस्तीफा देने के बाद कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इतना ही नहीं, पुराने रिकॉर्ड में काट-छांट कर नई कार्यकारिणी के गठन का दावा किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ दस्तावेजों पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जिनके आधार पर पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
बैठकें नहीं हुईं, फिर भी तैयार कर दी गई कार्यवाही, रेवाड़ी के 7 पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज
परिवाद में दावा किया गया है कि जिन तारीखों पर कार्यकारिणी की बैठकें दिखाकर प्रस्ताव पारित होने की बात कही गई, उन दिनों वास्तव में कोई बैठक आयोजित ही नहीं हुई थी। इसके बावजूद उन बैठकों की कथित कार्यवाही तैयार कर संबंधित विभाग के समक्ष पेश की गई। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नई कार्यकारिणी का पंजीकरण भी करा लिया गया।
सहकारिता विभाग में पंजीकरण को लेकर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित रूप से तैयार किए गए दस्तावेज सहकारिता विभाग में जमा कर नई कार्यकारिणी का पंजीकरण कराया गया। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि दस्तावेजों की तैयारी, हस्ताक्षरों और रिकॉर्ड में बदलाव के आरोप कितने सही हैं और पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल पुलिस ने अदालत के आदेश के अनुपालन में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, रिकॉर्ड, हस्ताक्षरों और संबंधित अधिकारियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
स्थानीय लोगों की नजर अब जांच पर
रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी से जुड़े इस मामले ने स्थानीय निवासियों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। लोगों का कहना है कि किसी भी सोसाइटी की कार्यप्रणाली पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए ताकि सदस्यों का भरोसा बना रहे।
अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।













