बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

हरियाणा: कभी मिलते थे ताने, इस ​महिला ने जैविक खेती में बनाई नई पहचान

Written by: हर्ष चौहान

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Success Story: हरियाणा की महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम कमा रही है। महिलाएं खेती में भी पुरुषों से कम नहीं है। आज हम आपको हरियाणा के कैथल के गांव कलासर की…


कभी मिलते थे ताने, इस ​महिला ने जैविक खेती में बनाई नई पहचान
कभी मिलते थे ताने, इस ​महिला ने जैविक खेती में बनाई नई पहचान
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Success Story: हरियाणा की महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम कमा रही है। महिलाएं खेती में भी पुरुषों से कम नहीं है। आज हम आपको हरियाणा के कैथल के गांव कलासर की महिला किसान पूजा आर्या के बारे में बताने जा रहे हैं जो 4 एकड़ में नेट फार्मिंग के जरिए 25 से 35 लाख रुपये कमा रही है। पूजा ने आसपास की लोगों के लिए उदाहरण पेश किया है।

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एक वक्त ऐसा भी था जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके अपने गुजारा कर रहा था। लेकिन आज पूजा ने अपनी लगन और मेहनत के बल पर खुद और अपने पूरे परिवार को मजबूत बना लिया है।Success Story

 

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कैथल की पूजा आर्य ने जहर मुक्त खेती को अपनाकर मिसाल पेश की है। कैथल के गांव कलासर की महिला किसान न केवल गांव के बल्कि दूसरे गांव के किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। महिला किसान स्वयं गेहूं व धान की फसल में कीटनाशक का प्रयोग करती थी, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ने के बाद न केवल जहरीली खेती को त्याग दिया, बल्कि जैविक खेती को अपनाया। घर की दो एकड़ जमीन में से एक एकड़ में खीरा लगाया। यहां से करीब आठ लाख रुपये सालाना कमाई कर रही है, वहीं एक एकड़ में पशुओं के लिए चारा लगाया हुआ है।

 

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किसान दिवस पर हुई सम्मानित

महिला किसान अपनी फसल को बेचने के लिए स्वयं मार्केटिंग भी करती। खीरा को न केवल कैथल जिले से बल्कि जींद, नरवाना, करनाल, कुरुक्षेत्र सहित पंजाब के कई शहरों से व्यापारी खरीदने के लिए आते हैं। महिला किसान ने बताया कि खेती के प्रति उनके कार्य को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र व हिसार में चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से किसान दिवस पर सम्मानित किया जा चुका है

लोग देते रहे ताने

ऐसे में एक दिन उसके पति ने उसे नेट फार्मिंग के बारे में बताया तो उन दोनों ने मिलकर अपनी जमीन पर नेट लगवाया और खीरे में अन्य सब्जियों की फार्मिंग शुरू की। जिस समय उन्होंने फार्मिंग शुरू की तो प्रशिक्षण के लिए कैथल कृषि विज्ञान केंद्र व अन्य संस्थानों में जाना पड़ता था।

 

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उस समय लोग उन्हें ताने भी देते थे कि पूजा तो हर तीसरे दिन झोला उठाकर शहर की तरफ चल देती है। पता नहीं क्या साबित करना चाहती, वह डॉक्टर बनेगी या साइंटिस्ट बनेगी। वह तानों को इग्नोर करती रही और अब सफलता उसके हाथ में है।

साल 2019 में की थी नेट फार्मिंग की शुरुआत

उन्होंने साल 2019 में नेट फार्मिंग शुरू की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब थी। उनके पति ने उन्हें महिलाओं के लिए दिए जा रहे नेट फार्मिंग की फ्री ट्रेनिंग के बारे में बताया। तब उन्होंने कैथल जाकर यह ट्रेनिंग करने की ठानी।

1 नेट हाउस से की थी शुरुआत

पूजा ने बताया कि शुरुआत में आर्थिक तंगी की वजह से उन्होने सिर्फ एक नेट हाउस लगाया था, लेकिन आज उनके पास 3 नेट हाउस है। उनके नेट हाउस में तैयार किया गया खीरा, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और आसपास की मंडियों में बिकने के लिए जाता है। इसके लिए वह फोन पर ही आढ़तियों से बात करती हैं और फसल को मंडियों में भेज देती हैं।Success Story

कई बार हो चुकी हैं सम्मानित

इस सफलता के लिए उन्हें राज्यपाल, सीएम और जिला स्तर पर कई बार सम्मान मिल चुका है। वह कहती हैं कि महिलाएं भी अपने परिवार को सशक्त बना सकती है। उनके दो बेटे हैं, जिनमें से एक तीसरी और दूसरा दूसरी कक्षा में पढ़ता है। बच्चों के लिए वह खुद खाना बना देती हैं. उसके बाद, खेतों में काम करने चली जाती हैं।

 

प्रदेशों की मंडियों में जाती है फसल

उनके नेट हाउस में तैयार किया गया खीरा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान यहां तक कि बीकानेर की मंडियों में भी जाता है। फसल की बिक्री को लेकर वे आढ़तियों से बातचीत कर लेते हैं और यहां से फसल भेज देते हैं। वहीं आढ़ती उनके खाते में पेमेंट कर देते हैं

हर्ष चौहान
About the Author हर्ष चौहान

हर्ष चौहान Best24News के लिए रेवाड़ी जिले की खबरें कवर करते हैं। वे जिले के शहर और गाँवों से जुड़े स्थानीय मुद्दे, प्रशासन के फैसले, विकास कार्य, शिक्षा और आम लोगों से जुड़ी खबरें पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि रेवाड़ी की हर ज़रूरी खबर तथ्यों की जाँच के साथ सबसे पहले आप तक पहुँचे। View all posts by हर्ष चौहान →

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