शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

Bhiwadi firecracker factory Blast: 9 मजदूरों की मौत एक माह बीता, गुनाहगार अफसरों पर कार्रवाई कब?

Written by: सुनील चौहान

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Bhiwadi firecracker factory Blast: किसी ने ठीक ही कहा है दादा बडा न भैया सबसे बडा रूपया। ये कहावत भिवाडी कंपनी में हुई आगजनी के हादसे को लेकर सही उतरती है। लोग…


Bhiwadi firecracker factory Blast: किसी ने ठीक ही कहा है दादा बडा न भैया सबसे बडा रूपया। ये कहावत भिवाडी कंपनी में हुई आगजनी के हादसे को लेकर सही उतरती है। लोग पहले ही कह रहे थे भले ही प्रशासन मामला दर्ज कर वाह वाह लूट ले लेकिन होना जाना कुछ नहीं है। भिवाडी अवैध पटाखा फैक्टी में नो मजदूरो की जान चली गई। प्रशासन ने एक तो नहीं तीन मामले दर्ज किए लेकिन हुआ क्या। असली मास्टर माइड को क्या बिगडा।

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असली गुनागारों पर कार्रवाई क्यों नही’ आजकल भिवाड़ी में यह चर्चा रोजाना हो रही है ​हादसे के लिए तो असली गुनागार थे उनका क्या हुआ। कुछ नहीं हुआ है। पैसे के बल पर सब कुूछ बदल दिया जाता है। घटना के लिए जो ​अधिकारी जिममेदार थे उनका बाल भी बाका नहीं हुआ है। Bhiwadi firecracker factory Blast

सिर्फ कागजों में हुई कारवाई— बता दे इस मामले को लेकर केबल कागजों में ही कार्रवाई की गई है। बता दे इस मामले को लेकरबीच 3 एफआइआर दर्ज कराई गई और अब तक 3 गिरफ्तारियां हुई हैं। इन मौतों के लिए जिम्मेदार रीको, प्रदूषण मंडल, नगर परिषद, श्रम विभाग और फैक्टरी एवं बॉयलर्स विभाग के अफसरों पर अब कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि प्रशासन ने इन्हीं विभागों के अफसरों की संयुक्त टीम बना दी। यानि तो चोर थे बइमान थे मोटी कमाइ कर रहे थे उनको ही जांच करने की जिम्मेदारी दे दी तथा मामला कागजो में दब जाए।

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वाह सरकार तेरा क्या कहना: भष्ट्राचार को रोकने के दावे करने वाली सरकार की असलीयत अब खुल कर सामने आ गई है इतने बडे हादसे के बावजूद अ​धिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लंबे समय से अवैध काम करवाकर मलाई खा रहे थे। बस कुछ दिन के बाद ये मामला दब हो जाएगा और फिर से वहीं कार्य शुरू हो जाएगा।

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राम भरोंसे जाचं: बता दे हादसे के बाद जिस टीम को प्रशासन ने फैक्टरियों की जांच का जिम्मा सौंपा था, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे फिर से न हों। इस टीम ने 24 फरवरी तक 1058 इकाइयों को विभागीय नियमों का उल्लंघन करने पर कागजी नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा। कितनी इकाइयों ने नोटिस का जवाब दिया, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। यानि अधिकारी भी इस गोरख धंधे में संलिप्त हो तो फिर कार्रवाई कौन रहे।

जानिए कब हुआ था ब्लास्ट: बता दे कि अलवर के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की अवैध पटाखा फैक्टरी 16 फरवरी को हुई घटना में 7 श्रमिकों की मौत उसी दिन हो गई थी। गंभीर रूप से झुलसे 8वें श्रमिक की मौत 22 फरवरी को और 9वें श्रमिक की मौत 26 फरवरी को हुई थी। घटना को आज एक महीना होने जा रहा है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कागज कार्रवाई ही जारी है।

24 फरवरी के बाद प्रशासन ने उक्त टीम की जांच एवं कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से तीन तीन लाख रुपए की सहायता राशि दी गई है। कुल मिलाकर मामले में नौ लोगों की मौत के लिए अब तक किसी की जिम्मेदारी तय करके कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

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ये कैसे कारवाई: बता दें कि अगर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में फुटपाथ पर पटाखे बेचे तो प्रशासन की टीम पूरी दुकान को ही जब्त कर ले जाती है। उसे पर जुर्माना गला दिया जाता है। लेकिन यहां तो यानि भिवाडी मे सरेआम पटखों की (आतिशबाजी) की अवैध फैक्टरी चल रही थी, लेकिन पुलिस ने उसे कागजो में दबा दिया।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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