सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

हरियाणा से शुरू होगा नया रेल युग! 17 जुलाई को पटरी पर उतरेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें इसकी खासियत

Written by: सुनील चौहान

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17 जुलाई को पटरी पर उतरेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन, हरियाणा जल्द ही भारतीय रेलवे के इतिहास का गवाह बनने जा रहा है। 17 जुलाई को जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन…


17 जुलाई को पटरी पर उतरेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन
17 जुलाई को पटरी पर उतरेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन
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17 जुलाई को पटरी पर उतरेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन, हरियाणा जल्द ही भारतीय रेलवे के इतिहास का गवाह बनने जा रहा है। 17 जुलाई को जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन का संचालन शुरू होने की तैयारी है। इस परियोजना को भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा पहल का अहम हिस्सा माना जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है।

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हरित तकनीक के साथ बदलेगी रेल यात्रा की तस्वीर

यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होगी, जिससे ट्रेन संचालित होगी। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा, बल्कि केवल जलवाष्प और गर्मी निकलेगी। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल माना जा रहा है।

जींद से सोनीपत तक आसान और किफायती सफर

नई हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच करीब 89 किलोमीटर लंबे रूट पर चलेगी। रास्ते में यात्रियों की सुविधा के लिए कई स्टेशनों पर ठहराव की व्यवस्था रहेगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार किराया आम लोगों की पहुंच में रखने की योजना है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सके।

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रफ्तार और क्षमता दोनों में होगी खास

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह ट्रेन लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल कर सकेगी। इसमें एक बार में करीब 2600 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी। ट्रेन में लगाया गया आधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम लगभग 1200 किलोवाट की शक्ति प्रदान करेगा, जिससे संचालन अधिक सुरक्षित और ऊर्जा दक्ष होगा।

देश के नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम

भारत सरकार वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। रेलवे में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से डीजल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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भारतीय इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि

इस ट्रेन का डिजाइन रेलवे के विशेषज्ञ संस्थान द्वारा तैयार किया गया है, जबकि इसका निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। आधुनिक तकनीक से लैस यह ट्रेन भारतीय रेलवे की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का भी उदाहरण मानी जा रही है।

भविष्य में कई और रूटों पर चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन

रेल मंत्रालय की योजना केवल एक ट्रेन तक सीमित नहीं है। “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज” मिशन के तहत आने वाले वर्षों में देश के विभिन्न हेरिटेज और पहाड़ी रेल मार्गों पर कई हाइड्रोजन ट्रेनें शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद मिलेगी।

वैश्विक सूची में भारत की मजबूत एंट्री

हाइड्रोजन तकनीक अपनाने वाले देशों की सूची में भारत भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन जैसे देशों के बाद अब भारत भी इस आधुनिक तकनीक का उपयोग करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल होने जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भविष्य की रेल व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

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सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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