शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

देश की पहली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन पहुंची हरियाणा के जींद, यात्रियों में उत्साह, जानिए कितना है इसका किराया

Written by: सुनील चौहान

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रेलवे मंत्रालय की हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हरियाणा के जींद जिले को देश की रेलवे व्यवस्था (हाइड्रोजन ट्रेन )में ऐतिहासिक पहचान मिली है। केंद्र सरकार की…


The country's first most powerful hydrogen train reached Jind in Haryana, passengers are excited, know its fare
The country's first most powerful hydrogen train reached Jind in Haryana, passengers are excited, know its fare
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रेलवे मंत्रालय की हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हरियाणा के जींद जिले को देश की रेलवे व्यवस्था (हाइड्रोजन ट्रेन )में ऐतिहासिक पहचान मिली है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से चलाई गई। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल वैकल्पिक ईंधन पर आधारित होगी और डीजल इंजनों की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। Hydrogen Train

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हरियाणा में जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का किराया तय हो गया है। जींद जंक्शन से दो स्टेशनों का सफर जहां मात्र 5 रुपए में होगा, वहीं इसका सोनीपत तक का एकतरफा किराया 25 रुपए तय हुआ है। अभी जहां ट्रेन से सोनीपत जाने में 2 घंटे से ज्यादा समय लगता है, वहीं हाइड्रोजन ट्रेन मात्र एक घंटे में ही ये सफर तय करेगी। ट्रेन का ठहराव भी केवल 6 स्टेशनों पर ही होगा। रेलवे इसके संचालन की तैयारी में लगा है।Hydrogen Train

लोगों में उत्साह: रेलवे फिलहाल 20 व 21 जनवरी को इस ट्रेन को चलाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि इसके संचालन की फाइनल डेट अभी तय होनी है। हाइड्रोजन ट्रेन कई मायनों में इस रूट पर चलने वाली दूसरी ट्रेनों से अलग है। यात्रियों में भी इसमें सफर को लेकर उत्साह है।Hydrogen Train

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जींद में स्थापित हाइड्रोजन संयंत्र के लिए 11 केवी की निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। यह संयंत्र ट्रेन के नियमित संचालन के दौरान ईंधन प्रदान करेगा। इस परियोजना के लिए स्थापित हाइड्रोजन संयंत्र की भंडारण क्षमता 3,000 किलोग्राम है और यह अब चालू होने के अंतिम चरण में है।Hydrogen Train

हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड को चुना गया है। यह रेल मार्ग कम दूरी और अपेक्षाकृत कम ट्रैफिक वाला होने के कारण पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उपयुक्त माना गया है। हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होगी, क्योंकि इससे केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होगा।

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रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा जींद और आसपास के क्षेत्रों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के साथ औद्योगिक और तकनीकी विकास को भी गति मिलेगी।

कई रूटों पर चलाने की है योजना: इस तकनीक को अपनाने वाले चुनिंदा देशों में भारत का नाम भी जुड़ जाएगा। इससे यहां विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे। यदि इस प्रोजेक्ट को सफलता मिलती है तो देश के कई अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी। हाइड्रोजन गैस से ट्रेन चलने के बाद रेलवे के लिए भी यह गर्व का पल होगा, क्योंकि जींद में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का पहुंचना केवल एक ट्रेन का आगमन नहीं, बल्कि तकनीकी क्रांति की शुरुआत है।

सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन: बता देकि भारत की यह ट्रेन ‘मेक इन इंडिया’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किया गया है। 10 कोच वाली यह ट्रेन एक साथ 2500 यात्रियों को ले जा सकती है : यह 2400 किलोवाट (1200 हॉर्स पावर की दो पावर कार) क्षमता वाली दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है। इसकी अधिकतम गति 140 किमी प्रति घंटा है इतना ही नहीं 360 किलो हाइड्रोजन में यह 180 किमी का सफर तय करेगी। जहाँ डीजल ट्रेन 1 किमी के लिए 4.5 लीटर ईंधन लेती है, वहीं यह मात्र 2 किलो हाइड्रोजन में उतनी ही दूरी तय करेगी।Hydrogen Train

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सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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