हरियाणा सरकार ने शहरी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बड़ी राहत देने वाला फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 से जुड़े लाभार्थियों के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी के नियमों में राहत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस फैसले से पात्र लोगों के लिए अपना घर लेना पहले के मुकाबले आसान और कम खर्चीला हो सकता है।
PM आवास योजना के लाभार्थियों को मिलेगी फीस में बड़ी राहत
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पंजीकृत EWS श्रेणी के लाभार्थियों को 60 वर्गमीटर तक की पात्र आवासीय इकाइयों पर विशेष छूट मिलेगी। ऐसे आवासों के स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़े कन्वेयंस डीड पर अब निर्धारित शुल्क लागू होगा। सरकार ने प्रति दस्तावेज 500 रुपये शुल्क तय करने का फैसला किया है।इसके साथ ही स्टांप ड्यूटी को भी घटाकर 500 रुपये प्रति दस्तावेज करने की मंजूरी दी गई है। इससे उन परिवारों को आर्थिक फायदा मिलेगा, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना घर प्राप्त कर रहे हैं और संपत्ति के दस्तावेज पूरे कराने में अतिरिक्त खर्च से परेशान होते हैं।
पहले कितना देना पड़ता था शुल्क?
हरियाणा में सामान्य तौर पर कन्वेयंस डीड पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क लागू होते हैं। इसके अलावा पंजीकरण शुल्क भी निर्धारित स्लैब के आधार पर लिया जाता है। ऐसे में सरकार के नए फैसले से योजना के पात्र लाभार्थियों पर दस्तावेज तैयार कराने का वित्तीय बोझ काफी कम होने की उम्मीद है।
लाल डोरा क्षेत्र के लोगों के लिए भी अहम फैसला
कैबिनेट बैठक में ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ी एक बड़ी समस्या को दूर करने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। सरकार ने हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) नियम-2026 को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य लाल डोरा और आबादी देह क्षेत्र में लंबे समय से संपत्ति पर रह रहे लोगों के अधिकारों को स्पष्ट और व्यवस्थित करना है।
संपत्ति मालिकों को मिलेगा कानूनी रिकॉर्ड का फायदा
नए नियमों के तहत पात्र संपत्तियों के स्वामित्व अधिकारों का स्थायी रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे ऐसे लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके पास लंबे समय से किसी संपत्ति पर कब्जा तो है, लेकिन उनके नाम पर स्वामित्व का स्पष्ट सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।स्वामित्व से जुड़े दावों के निपटारे के लिए अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज मंगाने, संबंधित पक्षों को बुलाने और साक्ष्य दर्ज करने जैसी शक्तियां भी दी जाएंगी। इससे संपत्ति के अधिकारों से जुड़े मामलों के निपटारे में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
ग्रामीण संपत्ति विवाद कम होने की उम्मीद
सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति से जुड़े पुराने विवादों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। स्वामित्व का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध होने से लोगों को अपनी संपत्ति से संबंधित सरकारी और वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने में भी आसानी हो सकती है। साथ ही भूमि प्रशासन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।













