गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे करने वाले लोगों को एक बड़ा झटका लगा है। इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन और भी ज्यादा आगे बढ़ गई है। NHAI आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब सितंबर 2026 के अंत तक तैयार किया जा सकता है। पहली बार ऐसा नहीं हुआ है जब इस हाईवे की डेडलाइन को बदल गया हो इसके पहले भी कई बार इस हाईवे की डेट लाइन से बदल गया है।
आखिर क्यों अटका हाईवे का काम?
परियोजना के अंतिम चरण में सबसे बड़ी चुनौती हाईटेंशन बिजली लाइनों को हटाने की बनी हुई है। सड़क के ऊपर से गुजर रही ट्रांसमिशन लाइनों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। जब तक हाई टेंशन तार को अलग जगह शिफ्ट नहीं किया जाता है तब तक इस परियोजना के अधूरे काम को पूरा नहीं किया जा सकता।हाईवे से जुड़े रेल ओवरब्रिज, फ्लाईओवर और अन्य संरचनाओं पर भी काम जारी है। अधिकारियों ने बताया कि कई जगहों पर काम फेंसिंग तक पहुंच गया है। वहीं कई जगह अधूरे कार्यों को पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि अब जो डेडलाइन दी गई है उसमें इस हाईवे का काम पूरा हो जाए।
किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
हाईवे शुरू होने के बाद गुरुग्राम, पटौदी, मानेसर, बिलासपुर, धारूहेड़ा और रेवाड़ी के बीच सफर पहले से तेज और आसान हो जाएगा। साथ ही दिल्ली-जयपुर हाईवे पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है, जिससे रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों और औद्योगिक क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी।
बार-बार क्यों बदल रही है डेडलाइन?
इस परियोजना को पिछले कुछ वर्षों में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। कभी तकनीकी मंजूरियों में देरी हुई तो कभी उपयोगिता सेवाओं को हटाने का काम समय पर पूरा नहीं हो सका। मौसम और अन्य निर्माण संबंधी चुनौतियों का असर भी परियोजना की रफ्तार पर पड़ा है।यदि बिजली लाइनों का स्थानांतरण और बाकी निर्माण कार्य तय समय पर पूरा हो जाता है, तो सितंबर 2026 तक इस फोरलेन हाईवे को यातायात के लिए खोलने की तैयारी है। इसके शुरू होने के बाद दक्षिण हरियाणा और राजस्थान की ओर सफर करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।













