Haryana News: रेवाड़ी: केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत रेवाड़ी जिला मुख्यालय पर पहुंची छह सदस्यीय विशेष निरीक्षण टीम ने शहर का दौरा करते हुए और सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इस दौरान टीम ने सफाई व्यवस्थाओं को परखने के साथ-साथ शहर के आम नागरिकों से सीधा संवाद भी किया।Haryana News
बता दे कि रेवाड़ी शहर में अपना काम पूरा करने के बाद अब यह केंद्रीय टीम जल्द ही जिले के दो प्रमुख नगर पालिका—बावल और धारूहेड़ा में सफाई व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए रुख करेगी।Swachh Survekshan Team Inspection Rewari
नागरिकों से लिया फीडबैक, शौचालयों की स्थिति जांची
बता दे टीम ने केंद्रीय निरीक्षण टीम ने इस बार केवल सरकारी दावों पर भरोसा न करके सीधे जनता के बीच जाकर फीडबैक जुटाया है। टीम ने लोगो ने बातचीत की तथा उनके जानकारी ली।
डोर-टू-डोर कलेक्शन: क्या आपके घर से रोजाना कूड़ा उठाया जाता है?
नगर परिषद के कार्य: सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली से जनता कितनी संतुष्ट है?
सार्वजनिक शौचालय व जागरूकता: निरीक्षण के दौरान शहर के सार्वजनिक शौचालयों की वास्तविक स्थिति देखी गई और नगर परिषद द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।
पिछला प्रदर्शन: रेवाड़ी, बावल और धारूहेड़ा को लगा था बड़ा झटका
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षणों में रेवाड़ी जिले का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था, जिसके चलते राष्ट्रीय रैंकिंग और ओडीएफ (ODF Status) दोनों में ही भारी गिरावट दर्ज की गई थीSwachh Survekshan Team Inspection Rewari
रेवाड़ी शहर पिछली बार 490वें स्थान पर खिसका गया था यानि राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर बड़ा झटका लगा था इतना ही नहीं बावल कस्बा की 1271वीं रैंकिंग दर्ज की गई इसकीस्थिति बेहद कमजोर और चिंताजनक रही थी। इतना ही नही धारूहेड़ा 637वें पायदान पर रहा था यानि यहां पर सफाई व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिली। जबकि धारूहेडा को एक स्वच्छता का अवार्ड भी मिल चुका है।
सफाई कर्मियों की कमी और डस्टबिन गायब होना मुख्य समस्या
निरीक्षण के दौरान यह बात भी उभरकर सामने आई कि आखिर रेवाड़ी शहर स्वच्छता के मामले में पिछड़ क्यों रहा है।
संसाधनों का अभाव: शहर में सबसे बड़ी समस्या सफाई कर्मचारियों की भारी कमी और डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण में लगातार होने वाली अनियमितता है।
खुले में कचरा फेंकने की मजबूरी: कई वार्डों और मुख्य बाजारों में सार्वजनिक डस्टबिन (कूड़ेदान) उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग खुले स्थानों पर कचरा डालने को मजबूर हैं, जिससे नए कचरा प्वाइंट बन गए हैं। इसके अलावा, ठोस कचरा निस्तारण व्यवस्था और एमआरएफ (MRF) सेंटर की स्थिति भी कसौटी पर ठीक नहीं मिला।












