शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु को भेजा ज्ञापन

Written by: Harsh Rajput

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धारूहेड़ा: शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी, धारूहेड़ा ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु को ज्ञापन भेजकर जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन में दिल्ली पुलिस द्वारा किया गये बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध…


शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु को भेजा ज्ञापन
शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु को भेजा ज्ञापन
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धारूहेड़ा: शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी, धारूहेड़ा ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु को ज्ञापन भेजकर जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन में दिल्ली पुलिस द्वारा किया गये बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, छात्रों पर दर्ज मुकदमे तुंरत रद्द करने तथा छात्रों की मांगों को अविलंब पूरा करने की मांग की है।

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कमेटी के अध्यक्ष रमेश चंद्र एडवोकेट ने कहा कि स्वतन्त्र भारत में छात्रों के आंदोलन पर सुनियोजित तरीके बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज जनवाद पसंद नागरिकों को झकझोर देने वाली घटना है तथा घोर निंदनीय है।जबकि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने छात्र आंदोलन को निर्दयतापूर्वक कुचलने की सभी हदें पार कर दी। छोटी-छोटी 15 साल की मासूम बच्चियों की कमर पर पुरूष पुलिस ने लाठियों से बेहिसाब वार किए।

आंदोलनकारियों पर पत्थर बरसाए। इतना ही नहीं छात्राओं से बदसलूकी के वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। पुलिस इतनी वहशी कैसे हो गई? बच्चियां रो रोकर गुहार लगा रही है कि सर हमें मत मारो आपके भी घर में बच्चे हैं लेकिन पत्थर दिलों को जरा भी रहम नहीं आया।इतनी कायरता पहले कभी नहीं देखी गई। लाठीचार्ज में सैकड़ों छात्र घायल हुए और कुछ को तो काफी गम्भीर चोटें आई हैं।एक बच्ची गम्भीर हालत में वैंटिलेटर पर है । उन्होंने कहा कि इस लाठीचार्ज ने अंग्रेजी शासन के अत्याचारों को भी पीछे छोड़ दिया है। सरकार का यह दमनकारी रवैया लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या है तथा हर जनवाद पसंद व्यक्ति के मन में चिंता पैदा करने वाला है।
पूर्व छात्र नेता रमेश चंद्र एडवोकेट ने कहा कि छात्र आंदोलनों के इतिहास में 20 जुलाई को काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सरकार सत्ता के मद में चूर है। आंदोलन में शामिल होने के लिए जाने वाले छात्रों व नागरिकों को डिटेन व हाऊस अरैस्ट किया जा रहा है। जबकि पूरा देश जानता है कि किस तरह एक के बाद एक पेपर लीक हो रहें हैं और फलस्वरूप निराशा में छात्र आत्महत्याएं कर रहे हैं। लेकिन फिर भी छात्रों के भविष्य व राष्ट्रहित में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में बुरी तरह से विफल हो चुके केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को पद से हटाया नहीं गया। सरकार के इस छात्र विरोधी रवैए के कारण ही आज पूरे देश का छात्र सड़कों पर उतर आया है।

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उन्होंने कहा कि कमेटी ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर छात्र हित में मांग रखी हैं कि जंतर-मंतर की घटनाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष व समयबद्ध जांच करवाई जाए। शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर बेरहमी से लाठी चार्ज व पुलिस द्वारा पत्थरबाजी की जांच हो तथा दोषियों को सजा दी जाए।। नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन, अभिव्यक्ति की आजादी जैसे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की गारंटी हो। अनियमितता व दुराचार साबित होने पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे तुंरत रद्द किए जाएं।जनांदोलन में पुलिस दखल बंद हो। सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती रहने को लेकर उठी चिंताओं पर स्पष्ट जानकारी दी जाए और मरीज की स्वायत्तता व चिकित्सकीय नैतिकता की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

Harsh Rajput
About the Author Harsh Rajput

मै हर्ष चौहान Best24News में बतौर राइटर कार्यरत हूं। रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by Harsh Rajput →

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