रेवाड़ी जिले के नेहरूगढ़ गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके नरेंद्र सिंह यादव ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच उन्होंने उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखीय चोटी माउंट पिको डी ओरिजाबा पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया। उनकी इस उपलब्धि को न केवल रेवाड़ी बल्कि पूरे हरियाणा के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।
आसान नहीं था यह सफर
ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई केवल शारीरिक ताकत का नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और धैर्य का भी इम्तिहान होती है। अभियान के दौरान टीम को बर्फीली हवाओं, ऑक्सीजन की कमी, फिसलन भरे रास्तों और बेहद कम तापमान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ऐसे हालात में भी नरेंद्र सिंह यादव ने संयम बनाए रखा और शिखर तक पहुंचकर भारतीय तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराया।
अंतरराष्ट्रीय अभियान में दिखाई नेतृत्व क्षमता
इस पर्वतारोहण अभियान में विभिन्न देशों के पर्वतारोहियों ने हिस्सा लिया था। कठिन मौसम के कारण सभी प्रतिभागी अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके, लेकिन भारतीय दल ने साहस और अनुभव का परिचय देते हुए सफलता हासिल की। अभियान में नरेंद्र सिंह यादव की भूमिका नेतृत्वकर्ता के रूप में भी अहम रही, जिसने उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया।
रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे हैं नरेंद्र
पर्वतारोहण के क्षेत्र में नरेंद्र सिंह यादव लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। वे सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले भारत के चुनिंदा पर्वतारोहियों में शामिल हैं। इसके अलावा वे दो बार माउंट एवरेस्ट पर भी तिरंगा फहरा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नाम कई उपलब्धियां और 23 विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं, जो उनके वर्षों के कठिन अभ्यास और समर्पण का परिणाम हैं।
सेवन वोल्कैनिक समिट्स मिशन पर जारी है सफर
नरेंद्र सिंह यादव का लक्ष्य केवल एक पर्वत पर चढ़ना नहीं, बल्कि दुनिया के सातों महाद्वीपों के प्रमुख ज्वालामुखीय पर्वतों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। इसी उद्देश्य के साथ वे ‘सेवन वोल्कैनिक समिट्स’ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही दिशा, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत की होती है।पर्वतारोहण के अलावा नरेंद्र सिंह यादव सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय रहते हैं। फिटनेस, राष्ट्रभक्ति और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से वे कई जनजागरूकता कार्यक्रमों का हिस्सा बन चुके हैं। लंबी दूरी की अल्ट्रा मैराथन पूरी कर वे युवाओं को अनुशासन, मेहनत और देश सेवा का संदेश भी देते रहे हैं।













