
रेवाड़ी: चक्रवाती तूफान अर्णब का असर हरियाणा में शुक्रवार को देखने को मिला। सुबह से देर शाम तक आसमान में बादल छाए रहे और तेज हवा के साथ दिनभर रुक-रुककर वर्षा होती रही। कभी बूंदाबांदी तो कभी तेज वर्षा के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। सड़कों पर जगह-जगह कीचड़ पसरा रहा। वर्षा और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं मंडी में हजारो टन बाजरा पानी से भीग गया। किसानों को इस तूफान से दोहरी मार हो रही हैंं
हवा हुई साफ, मौसम हुआ ठंडा: इस बार अक्टूबर ने मौसम और हवा की गुणवत्ता के कई रिकार्ड तोड़ दिए। एक ओर पहली बार अक्टूबर की सबसे साफ हवा दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर चार साल में सबसे ज्यादा वर्षा हुई। यह 2015 के बाद इस महीने का सबसे कम औसत है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, हालांकि बारिश की कोई संभावना नहीं है।
कई जगहों पर तेज हवा के कारण फसल के गिरने और कटाई के बाद खेतों में रखी उपज के भींगने की समस्या सामने आई है। हालांकि अब चक्रवाती तूफान अर्णब का प्रभाव कमजोर होने के साथ भारी वर्षा की गतिविधियों में आज से कमी के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र हरियाणा में शनिवार को सभी जिलों में बादलों की आवाजाही के बीच कई स्थानों पर छिटपुट व वर्षा की संभावना है। सुबह और रात्रि में विशेषकर हल्की ठंड का प्रभाव बना रहेगा। तेज हवा के साथ वर्षा होने से जिलों के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 घंटे के दौरान गुरूग्राम पाटोदी मे सबसे ज्यादा वर्षा दर्ज की गई।
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सरसों की बिजाई का संकट: बता दे जिले में वीरवार की सुबह हल्की बूंदाबांदी के साथ मौसम की शुरुआत हुई। दोपहर बाद गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हुई। शाम करीब चार बजे आसमान में अंधेरा छा गया और लगभग आधे घंटे तक तेज वर्षा हुई। शुक्रवार को रेवाड़ी में बारिश का सिलसिला जारी रहा। बारिश के बाद शहर के मॉडल टाउन, बस अड्डा, कंपनी बाग, नाईवाली चौक, नगर परिषद के आसपास और भाड़ावास गेट सहित शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। सड़कों पर जलभराव के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी हुई। धारूहेड़ा में दिल्ली जयपुर हाईवे पर काफी जलभराव हुआ जिससे वाहन चालक रेंगते रहे।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के खंड कृषि अधिकारी डॉ. अनिल यादव का कहना है कि जिले में सरसों की 90 प्रतिशत सरसों की बिजाई हो चुकी है। ऐसे में तेज बारिश होने से अंकुरित बीज और विकसित हो रहे पौधों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। हल्की बूंदाबांदी से फसल को नुकसान नहीं होता, लेकिन खेतों में अधिक पानी जमा होने से पौधों पर असर पड़ेगा।
