रेवाड़ी में बिजली निगम के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों ने सरकार के प्रस्तावित कदम के खिलाफ शहर में शक्ति प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारी विद्युत सदन से निकले और सचिवालय की ओर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने की मांग उठाई और आगे आंदोलन को और तेज करने के संकेत दिए।
कर्मचारियों ने आंदोलन को लेकर साफ किया अपना रुख
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बिजली निगम को निजी कंपनियों के नियंत्रण में देने की किसी भी योजना का वे विरोध करेंगे। उनका आरोप है कि बिजली व्यवस्था में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि बिजली निगम के संचालन को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे न बढ़ा जाए।
शहर में मार्च के बाद सचिवालय पहुंचे कर्मचारी
बिजली कर्मचारियों ने सुबह झज्जर रोड स्थित विद्युत सदन परिसर से अपना कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद कर्मचारी समूह के रूप में शहर के रास्तों से होते हुए सचिवालय की तरफ बढ़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। सचिवालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई थी और प्रवेश मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए थे।
10 अगस्त तक लोगों के बीच पहुंचाएंगे निजीकरण का मुद्दा
कर्मचारी नेताओं ने आंदोलन की अगली रणनीति भी सामने रखी। उनके मुताबिक आने वाले दिनों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान के माध्यम से आम लोगों को बिजली निगम के निजीकरण से जुड़े मुद्दों की जानकारी देने और उन्हें आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यह अभियान 10 अगस्त तक चलाने की बात कही गई है।
11 अगस्त से तीन दिन कामकाज से दूर रहने का फैसला
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संगठनों ने 11 अगस्त से 13 अगस्त तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की। कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन का अगला चरण होगा। यदि इस अवधि के बाद भी उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का निर्णय लिया जा सकता है।
सचिवालय के बाहर सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
बुधवार को कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए सचिवालय के मुख्य प्रवेश क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रवेश द्वार के सामने बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिसकर्मी सचिवालय के अंदर और बाहर दोनों तरफ मौजूद रहे। अधिकारियों की ओर से प्रदर्शन के दौरान स्थिति पर नजर रखी गई और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी रखी गई।













