हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह जिले की बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। इस मामले में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) द्वारा गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति समय पर अपनी रिपोर्ट जमा नहीं कर सकी है। अब रिपोर्ट आने में करीब दो सप्ताह और लगने की संभावना जताई गई है, जिसके बाद ही आयोग आगे का निर्णय लेगा।
रिपोर्ट में देरी से बढ़ा इंतजार
आयोग ने विशेषज्ञ समिति को शुरुआती तौर पर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद रिपोर्ट पूरी नहीं हो सकी। समिति ने अपने अध्ययन और मूल्यांकन को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। ऐसे में बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर होने वाला फैसला फिलहाल टल गया है।
जनसुनवाई के बाद बनाई गई थी विशेषज्ञ समिति
इस विषय पर विभिन्न पक्षों की राय जानने के लिए आयोग ने पहले व्यापक जनसुनवाई आयोजित की थी। इसमें बिजली कंपनियों, सरकारी बिजली निगमों, कर्मचारी संगठनों, किसान प्रतिनिधियों, उपभोक्ता संगठनों और अन्य हितधारकों ने अपने-अपने पक्ष रखे थे। सभी तर्क सुनने के बाद आयोग ने फैसला सुरक्षित रखते हुए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, ताकि तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके।
तीन विशेषज्ञ कर रहे हैं पूरे प्रस्ताव का मूल्यांकन
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आलोक निगम कर रहे हैं। उनके साथ ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ ई. रविंद्र कुमार शर्मा और वित्त विशेषज्ञ विभू प्रसाद महापात्र सदस्य के रूप में शामिल हैं। समिति ने जुलाई के मध्य से अपना काम शुरू किया था, लेकिन विस्तृत जांच के कारण रिपोर्ट तैयार करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
इन अहम बिंदुओं पर होगी गहन जांच
विशेषज्ञ समिति यह परखेगी कि संबंधित निजी कंपनी बिजली अधिनियम और HERC के सभी नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप समानांतर वितरण लाइसेंस प्राप्त करने की पात्रता रखती है या नहीं। इसके अलावा कंपनी की वित्तीय मजबूती, तकनीकी क्षमता, निवेश की योजना, उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव, बिजली दरों में बदलाव की संभावना, क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था, आपूर्ति की गुणवत्ता और सार्वजनिक हित जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
रिपोर्ट के बाद ही तय होगी आगे की दिशा
अब पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग सभी तथ्यों की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपी जाए या मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखा जाए। फिलहाल उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और बिजली क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों की निगाहें आयोग के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।













