Punjab News (Best24News): पंजाब के कपूरथला जिले के कादूपुर गांव में एक परिवार के साथ ऐसी अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाली घटना घटी है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। जिस बेटे को परिवार मृत मानकर रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार और भोग की रस्म तक निभा चुका था, वह करीब 28 दिन बाद अचानक जिंदा निकला। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है, जो कपूरथला की सेंट्रल जेल से आए एक फोन कॉल के बाद सामने आई।
अंतिम संस्कार के 28 दिन बाद सेंट्रल जेल से आया कॉल
बता दें कि कादूपुर निवासी परिवार अपने बेटे रवि कुमार को मृत मान चुका था। परिजनों ने बाकायदा उसका अंतिम संस्कार किया, रिश्तेदार शोक जताने पहुंचे और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार भोग की रस्म भी पूरी कर दी गई।
पूरा परिवार गम में डूबा हुआ था कि करीब 28 दिन बाद अचानक सेंट्रल जेल से एक फोन आया। दूसरी तरफ से जेल कर्मचारी ने बताया कि “आपका बेटा रवि जिंदा है और जेल में बंद है।” यह सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जेल पहुंचे परिजनों की आंखों में आए खुशी के आंसू
शुरुआत में परिजनों को इस खबर पर जरा भी भरोसा नहीं हुआ। जिस बेटे को वे खुद अपने हाथों से अंतिम विदाई दे चुके थे, उसके जेल में होने की बात गले नहीं उतर रही थी। लेकिन जब जेल प्रशासन ने बताया कि रवि खुद अपने परिवार से बात करना चाहता है, तो परिजन तुरंत सेंट्रल जेल पहुंचे।जेल में जब परिजनों ने सामने अपने बेटे रवि कुमार को जिंदा देखा, तो सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। जो घर मातम में डूबा था, वहां अचानक खुशियां लौट आईं।
बड़ा सवाल: आखिर वो शव किसका था जिसका हुआ अंतिम संस्कार?
बेटा वापस मिलने की अपार खुशी के बीच अब एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। आखिर जिस अज्ञात शव को रवि समझकर पुलिस ने परिजनों को सौंपा था और जिसका परिवार ने अंतिम संस्कार किया था, वह बदकिस्मत इंसान कौन था? इस पूरी घटना के सामने आने के बाद अब पुलिस और प्रशासन की पहचान प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं और मामले की नए सिरे से जांच की मांग की जा रही है।












