चंडीगढ़ (Best24News): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त (Quash) कर दिया है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया गया था। अदालत ने इस नीति को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए रोहतक PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी को परीक्षा देने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की तुरंत अनुमति प्रदान की है।
क्या था मामला?
पीजीआईएमईआर (PGIMS) रोहतक में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी ने ऑस्ट्रेलिया की ‘ऑब्जेक्टिव स्ट्रक्चर्ड क्लीनिकल एग्जामिनेशन’ (OSCE) में भाग लेने के लिए छुट्टी और विदेश यात्रा (NOC) की अनुमति मांगी थी। हालांकि, हरियाणा सरकार के 10 जून 2026 के दिशानिर्देशों का हवाला देकर उनका आवेदन खारिज कर दिया गया था। सरकार ने वैश्विक संकट, ईंधन संरक्षण और खर्चे में कटौती (Austerity Measures) का हवाला देते हुए सितंबर 2026 तक सभी कर्मचारियों की निजी व आधिकारिक विदेश यात्राओं पर पूर्ण बैन लगा रखा था।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘Sledgehammer to crack a nut’ मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार की पीठ ने सरकार के इस नियम पर कड़ा रुख अपनाया: अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़ा: कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार का यह कदम “अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का उपयोग करने जैसा” (Using a sledgehammer to crack a nut) है।
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मौलिक अधिकारों का हनन: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न अंग है। केवल प्रशासनिक निर्देशों के बल पर इस पर पूर्ण रोक नहीं लगाई जा सकती। तर्कहीन फैसला: अदालत ने सवाल उठाया कि एक नर्सिंग ऑफिसर के अपने खर्च पर निजी परीक्षा के लिए विदेश जाने से सरकार के ईंधन या संसाधनों की बचत से क्या संबंध है।
हाईकोर्ट ने सरकार के 10 जून के बैन वाले आदेश को रद्द करते हुए सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को तुरंत प्रभाव से विदेश जाने की अनुमति जारी की जाए।
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