धारूहेड़ा (Best24News): शहर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णाहुति, हवन यज्ञ और विशाल भंडारे के आयोजन के साथ समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में पहुंचकर कथा व्यास का आशीर्वाद लिया, हवन कुंड में आहुतियां डालीं और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

हवन से होती है वातावरण और आत्मा की शुद्धि: कथा वाचक भारत भूषण
कथा समापन के अवसर पर आयोजित हवन यज्ञ के दौरान प्रसिद्ध कथा वाचक व्यास भारत भूषण ने श्रद्धालुओं को हवन और यज्ञ का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व विस्तार से समझाया व्यास भारत भूषण ने कहा कि सनातन धर्म में हवन का विशेष महत्व है। हवन यज्ञ में दी जाने वाली आहुतियां देवताओं तक पहुंचती हैं, जिससे घर-परिवार और समाज में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

उन्होंने बताया कि हवन में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियां (गूगल, कपूर, जड़ी-बूटियां और देसी घी) जब अग्नि के संपर्क में आती हैं, तो वातावरण में फैले हानिकारक जीवाणुओं का नाश होता है। इससे न केवल पर्यावरण शुद्ध होता है, बल्कि मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है।
विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
आयोजक डा अश्वनी जोशी ने बताया कि पूर्णाहुति और आरती के उपरांत मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।












