धारूहेड़ा (Best24News): राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी से आ रहे फैक्ट्रियों के रसायनयुक्त दूषित पानी ने एक बार फिर धारूहेड़ा के लोगों का जीवन नारकीय बना दिया है। शुक्रवार रात को भिवाड़ी की तरफ से छोड़े गए अथाह जहरीले काले पानी के कारण धारूहेड़ा के कई इलाकों में बाढ़ जैसे गंभीर हालात बन गए हैं। आलम यहां तक यह पानी जगह जगह जमा हो गया है।

दूषित पानी का सबसे अधिक असर बेस्टेक सोसाइटी, एम2के (M2K) सोसाइटी, सेक्टर-6 और दिल्ली-जयपुर हाईवे की सर्विस लेन के आसपास के इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां सड़कों पर कई-कई फीट काला पानी भर गया है। जलभराव के लोगों केा पानी के अंदर से गुजरना पड रहा है।
बारिश का नहीं, फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त पानी
अक्सर भिवाड़ी प्रशासन यही कहता है आया है बारिश का पानी बहाव के चलते धारूहेड़ा में पहुंच रहा है लेकिन यह सरासर झूठ है। धारूहेड़ा निवासियों ने कहा कि यह जलभराव किसी बारिश के कारण नहीं, बल्कि राजस्थान की फैक्ट्रियों द्वारा अवैध रूप से बहाया गया दूषित औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Effluent) है। जो अलवर बाइपास पर जमा हो रहा है तथा अब रात को मोर्डन स्कूल की दीवार तोडकर हरियाणा में धकेल दिया गया है। सड़कों पर काले पानी के भराव के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी गहरे गड्ढों और जहरीले पानी के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

“5 साल पुराना मुद्दा, कागजों तक सीमित NGT के आदेश” अजय जांगड़ा
नगर पालिका धारूहेड़ा के चेयरमैन अजय जांगड़ा, पार्षद डीके शर्मा, पार्षद त्रिलोक धारीवाल, आरडब्ल्यूए पूर्व प्रधान कृष्ण यादव, धर्मपाल और नरेंद्र ने बताया कि यह समस्या पिछले 5 वर्षों से लगातार बनी हुई है। मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास भी जा चुका है, जहां से राजस्थान सरकार को कई बार फटकार लगाई गई और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने के निर्देश दिए गए। लेकिन पिछले कई सालों से यही कहा जा रहा है इस साल में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)बना जाएगा जबकि केवल कागजो मे काम हो रहा है।
अधिकारी भर रहे जेब: राजस्थान में प्रदूषण विभाग,रीकों व नेता कंपपियों से एसटीपी के पानी के नाम पर मोटी राशि वसूल कर जेब भर रहे है। क्योंकि 80 फीसदी कंपनियो में एसटीपी ही नहीं है। जबकि पैसे लेकर एटीवी का होना दिखाया गया है। यही कारण है बार बारिश की आड में कंपिनयो से काला पानी छोडा जा रहा है। तमाम अदालती आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं। भिवाड़ी प्रशासन और फैक्ट्रियां मौका पाते ही इस दूषित पानी को धारूहेड़ा की सीमा में धकेल देते हैं।
कई बार शिकायत पर सुनवाई नही: बता दे कि दूषित पानी को रोकने के लिए एक महीने पहले चेयरमैन अजय जांगड़ा और M2K सोसाइटी के प्रधान सुरेंद्र शर्मा ने जिला उपायुक्त (DC) को ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
केमिकलयुक्त काले पानी के लंबे समय तक जमा रहने से क्षेत्र में बदबू फैल रही है और गंभीर संक्रामक व त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।














