धारूहेड़ा (Best24News): धारूहेड़ा शहर व सेक्टरों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासी और व्यापारी बेहद परेशान हैं। नगर पालिका (Municipal Council) द्वारा बंदरों को पकड़ने के लिए चलाए जाने वाले अभियान धरातल के बजाय केवल कागजों में ही चलते नजर आ रहे हैं। प्रशासन की ढिलाई के चलते आम जनता का सड़कों पर चलना और छतों पर जाना दूभर हो गया है।

गलियों से लेकर छतों तक दहशत, रोज हो रहे हादसे
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के विभिन्न वार्डों, आवासीय सोसायटियों और बाजारों में बंदरों के झुंड लगातार हुड़दंग मचा रहे हैं। आए दिन बंदर राहगीरों, बुजुर्गों और बच्चों पर हमला कर उन्हें काटकर घायल कर रहे हैं। घरों की छतों पर सुखाए कपड़े, पानी की टंकियां और छज्जों पर रखे सामान को बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं। मुख्य बाजार में दुकानों के बाहर रखा सामान उठाकर भाग जाना और खरीदारों को डराना आम बात हो गई है।

“कागजों तक सीमित रहे नगरपालिका के दावे”
धारूहेड़ा वासियों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका प्रशासन और अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें दे चुके हैं। नपा की बैठकों में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर जारी करने और अभियान चलाने के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। निवासियों ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे बंदर पकड़ो अभियान केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन व नगर पालिका धारूहेड़ा से मांग की है कि समस्या को गंभीरता से लेते हुए तुरंत विशेषज्ञों की टीम बुलाई जाए और बंदरों को पकड़कर दूर जंगलों या सुरक्षित स्थानों पर छुड़वाया जाए।














