CM सैनी का बड़ा ऐलान, हरियाणा सरकार अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए बड़े स्तर पर नई रणनीति लागू करने की तैयारी में है। प्रदेश में जल्द नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी लाई जा सकती है। इसके साथ ही बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों के खिलाफ सख्ती बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा दिए बिना प्रदूषण की चुनौती से प्रभावी तरीके से नहीं निपटा जा सकता।गुरुग्राम में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अधिकारियों के साथ वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य NCR के शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम तय करना रहा।
अब प्रदूषण नियंत्रण पर सिर्फ चर्चा नहीं, जमीन पर दिखेगा असर
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। सरकार चाहती है कि केवल योजनाएं बनाकर फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर लोगों को सड़कों पर भी दिखाई दे। इसी वजह से ट्रैफिक, धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और वाहनों से निकलने वाले धुएं पर एक साथ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि आगामी कैबिनेट बैठक में नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति पेश की जा सकती है। इस नीति का मकसद प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना, चार्जिंग स्टेशनों का तेजी से विस्तार करना और लोगों को स्वच्छ परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बिना PUCC के ईंधन मिलने पर लग सकती है रोक
सरकार ‘No PUCC, No Fuel’ व्यवस्था को लेकर भी गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीजल मिलने में परेशानी हो सकती है। इसका उद्देश्य ऐसे वाहनों की पहचान करना है जो जरूरत से ज्यादा धुआं छोड़ रहे हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।बैठक में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और अन्य NCR शहरों के प्रमुख चौराहों को हरित स्वरूप देने पर भी जोर दिया गया। इन स्थानों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण, नियमित सफाई, सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने और धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदूषण वाले प्रमुख क्षेत्रों की पहचान कर वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार कार्य शुरू किए जाएं।














