रेवाड़ी (Best24News): आमजन को शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को रेवाड़ी जिला मुख्यालय सहित उपमंडल कोसली और बावल के अदालती परिसरों में तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (HALSA) के निर्देशानुसार आयोजित इस लोक अदालत का संचालन जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर सिंह वाधवा के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त मुख्य दंडाधिकारी अमित वर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान विभिन्न न्यायिक पीठों के समक्ष रखे गए कुल 18,421 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया, जिसमें 7,39,50,131 रुपये (सात करोड़ उनतालीस लाख पचास हजार एक सौ इकतीस रुपये) की भारी-भरकम राशि के समझौते पारित किए गए।लोक अदालत में मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए रेवाड़ी जिला अदालत तथा उपमंडलीय अदालतों में विशेष पीठों (Benches) का गठन किया गया था
रेवाड़ी जिला मुख्यालय: अरविंद नशियर (प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय), अमित गौतम (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश), जोगिंदरी (अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं CJM), विश्वास खटक (सिविल जज जूनियर डिवीजन) और आशीष मंडल (सिविल जज जूनियर डिवीजन) की पीठों ने मामलों की सुनवाई की।
- बावल उपमंडल: आलोक आनंद (अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं SDJM) की पीठ गठित की गई।
- कोसली उपमंडल: अशोक कुमार (अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं SDJM) की देखरेख में पीठ ने कार्य किया।
बावल उपमंडलीय न्यायालय: 104 मामलों में 54.81 लाख का समझौता
उपमंडल बावल में एसडीजेएम (SDJM) आलोक आनंद की बेंच के समक्ष रखे गए मुकदमों में से दोनों पक्षों की सुलह-समझौते के आधार पर कुल 104 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इस दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल में 54,81,735 रुपये की समझौता राशि के आदेश पारित किए गए।
किन मामलों का हुआ समाधान?
लोक अदालत के दौरान वर्षों से लंबित पड़े विभिन्न श्रेणियों के मुकदमों का निपटारा किया गया, जिनमें मुख्य रूप से ये शामिल है।
- दीवानी और फौजदारी से जुड़े मामले
- एनआई एक्ट (चेक बाउंस) और बैंक ऋण वसूली के मामले
- मोटर दुर्घटना दावा (MACT) और यातायात चालान
- पारिवारिक/वैवाहिक विवाद और उपभोक्ता अदालत के मामले
- भूमि अधिग्रहण और श्रम (Labor) संबंधी विवाद
समय और धन दोनों की हुई बचत
न्यायाधीशों ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले भी जिले में प्री-लोक अदालतों का आयोजन कर लंबित और पूर्व-विवादित मामलों का निस्तारण किया गया था। लोक अदालत के माध्यम से विवादों का समाधान होने से पक्षकारों के बीच की कड़वाहट खत्म होती है, बार-बार अदालत के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलती है तथा समय और धन दोनों की सीधी बचत हो












