गुरुग्राम नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से कार्यरत ड्राफ्ट्समैन सोमबीर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। नगर निगम का कहना है कि पूरे मामले में तय प्रक्रिया के अनुसार जांच, दस्तावेजों की समीक्षा और कर्मचारी का पक्ष सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लिया गया।नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के दौरान कई प्रक्रियागत खामियां सामने आईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित फाइलों की दोबारा समीक्षा कराई गई और उपलब्ध अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट में यह माना गया कि निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं हुआ, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो सकती थी।
स्पष्टीकरण के बावजूद नहीं बदल सका विभाग का निर्णय
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद लिखित जवाब देने के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने उपलब्ध साक्ष्यों और कर्मचारी के स्पष्टीकरण का मूल्यांकन करने के बाद पाया कि जवाब आरोपों का संतोषजनक समाधान नहीं कर सका।सक्षम प्राधिकारी ने विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एचकेआरएन के माध्यम से नियुक्त ड्राफ्ट्समैन सोमबीर की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही कार्रवाई संबंधी आदेश की प्रति संबंधित विभागों और हरियाणा कौशल रोजगार निगम को भी भेज दी गई, ताकि आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
नगर निगम ने दिया पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि टेंडर प्रक्रिया सहित किसी भी सरकारी कार्य में नियमों की अनदेखी, लापरवाही या प्रक्रियाओं का उल्लंघन किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी कर्मचारियों से ईमानदारी, निष्पक्षता और निर्धारित नियमों के अनुसार कार्य करने की अपेक्षा की जाती है।नगर निगम ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी टेंडर प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कार्यों की नियमित निगरानी जारी रहेगी। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जनता का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।













