रेवाड़ी में इस बिमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट, रेवाड़ी में लोगों को TB के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से सिविल अस्पताल में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर जांच कराने के महत्व और नियमित उपचार की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए जांच कराना बेहद जरूरी है। अधिकारियों ने कहा कि समय पर इलाज शुरू होने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है और संक्रमण के फैलने का खतरा भी काफी कम हो जाता है।
दो सप्ताह से अधिक खांसी हो तो तुरंत कराएं जांच
अभियान के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी बनी रहती है, साथ में बुखार आता है, वजन तेजी से कम हो रहा है या रात में अत्यधिक पसीना आता है, तो इसे सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे लक्षण टीबी की ओर संकेत कर सकते हैं। इसलिए जल्द से जल्द नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सिविल अस्पताल पहुंचकर जांच कराना जरूरी है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने से इलाज अधिक प्रभावी साबित होता है।
सरकारी अस्पतालों में जांच और दवाएं पूरी तरह नि:शुल्क
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच से लेकर उपचार तक सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध हैं। मरीजों को आवश्यक दवाइयां भी बिना किसी शुल्क के दी जाती हैं।
विभाग का कहना है कि नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। बीच में इलाज छोड़ने से बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है और दवाओं का असर भी कम हो सकता है।
मरीजों के साथ भेदभाव नहीं, सहयोग की जरूरत
अभियान में मौजूद अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि टीबी के मरीजों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें। समाज का सहयोग और परिवार का साथ मरीज के इलाज को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कई बार जानकारी के अभाव में लोग मरीजों से दूरी बनाने लगते हैं, जबकि सही इलाज और सावधानी अपनाने से टीबी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज का मनोबल बढ़ाना और समय पर दवा लेने के लिए प्रेरित करना भी उतना ही जरूरी है।
जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी उपाय
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। यदि लोग बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचान लें और जांच कराने में देर न करें, तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
अभियान के दौरान अस्पताल आए लोगों को यह भी बताया गया कि खांसते या छींकते समय मुंह ढकना, साफ-सफाई का ध्यान रखना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी कदम हैं।
समय पर इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है टीबी
स्वास्थ्य विभाग ने दोहराया कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। आधुनिक चिकित्सा और सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध मुफ्त उपचार की मदद से मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है।
जरूरत केवल इस बात की है कि बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए और लक्षण दिखाई देते ही जांच कराई जाए। विभाग ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उसे भी जांच कराने के लिए प्रेरित करें, ताकि समय रहते उपचार शुरू हो सके और समाज को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास सफल हो सकें।












