Rewari News: रेवाड़ी शहर में शनिवार सुबह हुई हल्की बारिश ने एक बार फिर नगर की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी। कुछ ही देर की बारिश के बाद कई प्रमुख सड़कों और बाजारों में नालों का गंदा पानी सड़क पर फैल गया, जिससे लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा है।
बारिश के साथ ही सड़कें बनीं जलभराव का केंद्र
बारिश शुरू होने के कुछ समय बाद ही शहर के कई इलाकों में पानी जमा होने लगा। मॉडल टाउन, रेलवे रोड, बस स्टैंड के आसपास, झज्जर चौक, ब्रास मार्केट, नई अनाज मंडी रोड, सर्कुलर रोड और दिल्ली रोड के निचले हिस्सों में नाले का पानी सड़क पर फैल गया। कई जगह दोपहिया वाहन चालकों को पानी के बीच से गुजरना पड़ा, जबकि पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दुकानदारों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी
जलभराव की वजह से बाजारों में आने वाले ग्राहकों की संख्या भी प्रभावित हुई। कई दुकानदारों ने बताया कि सड़क पर गंदा पानी भर जाने से लोगों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी हुई। वहीं राहगीरों को भी कीचड़ और बदबू के बीच होकर गुजरना पड़ा। कई स्थानों पर वाहनों की रफ्तार धीमी होने से जाम जैसी स्थिति भी देखने को मिली।
नालों की सफाई पर उठे सवाल (Rewari News)
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले नालों की सफाई के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही हल्की बारिश में उनकी पोल खुल गई। लोगों का आरोप है कि कई नालों में सिल्ट और कचरा जमा होने के कारण बारिश का पानी समय पर नहीं निकल पाया और वह सड़कों पर फैल गया।
हर साल दोहराई जाती है वही समस्या
शहर के कई इलाकों में हर मानसून के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इसके बावजूद अब तक स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी सफाई अभियान चलाने से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए जल निकासी व्यवस्था को आधुनिक बनाने और नियमित निगरानी की जरूरत है।
लोगों ने प्रशासन से की स्थायी समाधान की मांग
शहरवासियों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से मांग की है कि जलभराव वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां तत्काल सुधार कार्य कराए जाएं। साथ ही नालों की नियमित सफाई, पानी निकासी के वैकल्पिक इंतजाम और मानसून के दौरान निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि हल्की बारिश में भी लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

















