
Rewari News: औद्योगिक क्षेत्र आईएमटी बावल में हर मानसून के दौरान जलभराव से होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए सिंचाई विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। वर्षा के पानी की तेज निकासी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से करीब 7.35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पंप हाउस बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले समय में परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।
आधुनिक तकनीक से होगी बारिश के पानी की निकासी
प्रस्तावित पंप हाउस को इस तरह तैयार किया जाएगा कि भारी बारिश के दौरान आईएमटी बावल और आसपास के क्षेत्रों में जमा पानी को तेजी से पंप कर साहबी नदी के कैचमेंट क्षेत्र की ओर भेजा जा सके। परियोजना में सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल कार्य शामिल किए गए हैं, ताकि पूरी व्यवस्था आधुनिक और प्रभावी तरीके से संचालित हो सके।
उद्योगों और कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा लाभ (Rewari News)
आईएमटी बावल हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता है। बरसात के मौसम में कई बार सड़कों और फैक्ट्रियों के आसपास पानी भरने से उद्योगों का संचालन प्रभावित होता है। कर्मचारियों की आवाजाही, माल की ढुलाई और परिवहन व्यवस्था भी बाधित होती है। नई जल निकासी व्यवस्था लागू होने के बाद इन समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
ये भी पढ़ें:वंदे मातरम्” कविता से राष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ का विद्यालय में भव्य अभिनंदन
पहले पाइपलाइन, अब पंप हाउस पर फोकस
जल निकासी को मजबूत बनाने के लिए इससे पहले भूमिगत पाइपलाइन परियोजना भी शुरू की जा चुकी है। इस योजना के तहत ट्रेंचलेस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हाईवे, रेलवे लाइन और प्रमुख सड़कों के नीचे पाइपलाइन बिछाई जाएगी। अब पंप हाउस बनने के बाद दोनों परियोजनाएं मिलकर बारिश के पानी की निकासी को और अधिक प्रभावी बनाएंगी।
17 जुलाई तक जमा होंगे टेंडर
विभाग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार इच्छुक एजेंसियां 17 जुलाई तक अपने टेंडर जमा कर सकेंगी। उसी दिन निविदाएं खोली जाएंगी, जिसके बाद पात्र एजेंसी का चयन कर निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
ये भी पढ़ें:राजपूत महासभा धारूहेड़ा की बैठक में फैसला, 20 अक्टूबर को सामूहिक रूप से मनाया जाएगा दशहरा
65 करोड़ की समग्र योजना का हिस्सा
यह आधुनिक पंप हाउस आईएमटी बावल की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तैयार की गई करीब 65 करोड़ रुपये की व्यापक योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, इस परियोजना को लेकर पहले कुछ ग्रामीण क्षेत्रों की ओर से चिंता भी जताई गई थी। उनका कहना था कि नई व्यवस्था का असर आसपास के गांवों में जलभराव की स्थिति पर भी पड़ सकता है। विभाग का कहना है कि सभी तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करते हुए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ीं
आईएमटी बावल से जुड़े उद्यमियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो हर वर्ष बारिश के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या में काफी राहत मिलेगी। इससे औद्योगिक गतिविधियां बिना रुकावट जारी रहेंगी और सड़क नेटवर्क के साथ सार्वजनिक सुविधाओं को भी बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।
