Sapna Choudhary: हरियाणा फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित जोड़ी सपना चौधरी और वीर साहू का तलाक होने वाला है। शादी के मात्र 4 साल के बीच दोनों अलग होने वाले हैं जिससे फैंस को तगड़ा झटका लगा है। लंबे समय तक दोनों ने एक दूसरे को डेट किया इसके बाद शादी की हालांकि शादी इतनी जल्दी टूट जाएगी इस पर किसी को यकीन नहीं था। दोनों के बीच लंबे समय से कुछ सामान्य नहीं चल रहा है इसी बीच दोनों की तलाक की खबर भी सामने आ रही है। जानते हैं दोनों के बीच क्यों हो रहा है तलाक…
सोशल मीडिया पर भी दिखी बढ़ती दूरी
सोशल मीडिया पर सपना चौधरी और वीर साहू के रिश्ते को लेकर दरार देखने को मिल रहा था। दोनों ने लंबे समय से कोई भी सोशल मीडिया पोस्ट साथ में नहीं किया था।
गोशाला में हुई थी पहली मुलाकात
सपना चौधरी और वीर साहू की पहली मुलाकात वर्ष 2016 में हिसार के एक धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। इस दौरान दोनों की ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी लेकिन धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती बढ़ने लगी और बातचीत भी बढ़ने लगी।
चार साल की दोस्ती के बाद की थी शादी
4 साल तक दोनों एक दूसरे को डेट करते रहे और एक दूसरे को अच्छी तरह से समझने के बाद उन्होंने 2020 में शादी की थी। दोनों का एक बेटा भी है।
रिश्ते में तनाव की 4 प्रमुख वजहें
1. अलग-अलग स्टारडम और सोच
दोनों अपने-अपने क्षेत्र के लोकप्रिय कलाकार हैं। सपना चौधरी जहां मंचीय प्रस्तुतियों और ग्लैमर इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं, वहीं वीर साहू गायकी और अभिनय के साथ अपनी अलग पहचान रखते हैं। करीबी लोगों के अनुसार दोनों की कार्यशैली और सोच में समय के साथ अंतर बढ़ता गया, जिससे रिश्ते पर असर पड़ा।
2. लाइफस्टाइल में बड़ा अंतर
लाइफस्टाइल में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। एक तरफ वीर साहू को सादगी भरी जिंदगी पसंद है वहीं दूसरी तरफ सपना चौधरी को काफी वेस्टर्न पसंद है।
3. लंबे समय तक अलग-अलग रहना
शादी के बाद भी दोनों अक्सर अलग-अलग स्थानों पर रहते थे। सपना अपने काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते दूसरे शहरों में अधिक समय बिताती थीं, जबकि वीर साहू अपने गांव और फार्महाउस के जीवन को प्राथमिकता देते रहे। लंबे समय तक बनी यह भौगोलिक दूरी रिश्ते पर प्रभाव डालती रही।
4. निजी पसंद और प्राथमिकताओं में अंतर
करीबी लोगों के अनुसार दोनों की व्यक्तिगत पसंद और जीवन को देखने का नजरिया भी काफी अलग था। शादी की पहली सालगिरह के दौरान भी दोनों की सोच में यह अंतर सार्वजनिक रूप से देखने को मिला था। जहां सपना विशेष अवसरों को उत्साह के साथ मनाने की पक्षधर थीं, वहीं वीर साहू ऐसे आयोजनों को ज्यादा महत्व नहीं देते थे।













