हरियाणा के हिसार जिले के गांव भेरिया के युवा मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग प्रतियोगिता में पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया। वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का नतीजा आखिरकार गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया। इस उपलब्धि के बाद पूरे गांव में जश्न का माहौल है और परिवार से लेकर खेल प्रेमियों तक हर कोई उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।
फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन से जीता गोल्ड
खिताबी मुकाबले में अंकुश ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। तेज फुटवर्क, सटीक पंच और बेहतरीन काउंटर अटैक की बदौलत उन्होंने इंग्लैंड के मुक्केबाज को पूरे मुकाबले में दबाव में रखा। उनकी रणनीति और आत्मविश्वास ने उन्हें स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।फाइनल से पहले सेमीफाइनल में भी अंकुश ने दमदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा के खिलाड़ी को एकतरफा अंदाज में हराया था। इस जीत के बाद साफ हो गया था कि वह गोल्ड के सबसे मजबूत दावेदार हैं।
11 साल की उम्र से शुरू हुई थी संघर्ष की कहानी
अंकुश ने बचपन में ही बॉक्सिंग को अपना सपना बना लिया था। रोजाना लंबी दूरी तय कर प्रशिक्षण लेना, घंटों अभ्यास करना और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। इसी निरंतर मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।करियर के शुरुआती दौर में कई लोगों ने उनकी उम्र और कद-काठी को लेकर सवाल उठाए। एक समय ऐसा भी आया जब लगातार संघर्ष और हार के बाद उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन परिवार और कोच ने उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने हार को सीख में बदल दिया और लगातार मेहनत करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली।
कड़ी ट्रेनिंग और अनुशासन बना सफलता का आधार
अंकुश रोजाना कई घंटे अभ्यास करते हैं। उनकी ट्रेनिंग में फिटनेस, पंचिंग स्पीड, फुटवर्क, डिफेंस और काउंटर अटैक पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संतुलित खानपान और नियमित अभ्यास ने उनकी फिटनेस को भी मजबूत बनाया, जिसका फायदा बड़े मुकाबलों में साफ दिखाई देता है।कोच प्रदीप सावंत के अनुसार हर मुकाबले से पहले विरोधी खिलाड़ी की शैली का गहराई से अध्ययन किया गया था। फाइनल के लिए भी विशेष रणनीति तैयार की गई थी, जिसे अंकुश ने रिंग में शानदार तरीके से लागू किया। अब पूरी टीम की नजर एशियन गेम्स की तैयारियों पर है।
मां ने कहा— बेटे ने अपना वादा निभा दिया
अंकुश की मां ने बताया कि परिवार को पहले से ही उनके आत्मविश्वास पर भरोसा था। मुकाबले से पहले उन्होंने कहा था कि वह स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटेंगे और आखिरकार उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिखाया।अंकुश के पिता का कहना है कि खेल के प्रति समर्पण और लगातार मेहनत ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने हमेशा बेटे का मनोबल बढ़ाया और आज उसी का परिणाम पूरे देश के सामने है।अंकुश के बड़े भाई, जो स्वयं भी बॉक्सर हैं, का कहना है कि पिछले एक वर्ष में उनके खेल में जबरदस्त सुधार देखने को मिला। उनका मानना है कि यह जीत आने वाले समय में देश के कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी।
अब एशियन गेम्स में इतिहास रचने की तैयारी
कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने के बाद अब अंकुश पंघाल का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतना है। परिवार, कोच और खेल प्रेमियों को विश्वास है कि यदि वह इसी तरह मेहनत करते रहे तो आने वाले वर्षों में भारतीय बॉक्सिंग को कई और बड़ी सफलताएं मिल सकती हैं।अंकुश पंघाल की कहानी केवल एक गोल्ड मेडल जीतने की नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल है। जिन्होंने कभी उनके सपनों पर सवाल उठाए थे, आज वही उनकी सफलता की मिसाल दे रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।













