शनिवार, 7 नवम्बर 2026

Haryana में पराली जलाने का बड़ा सच, जींद, फतेहाबाद और हिसार के किसानों की चुनौती, बाकी शहरों में कमी, पढ़िए पूरा सस्पेंस

Written by: Best24News

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Haryana में अगले दो वर्षों में पराली जलाने को शून्य करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जिंद, फतेहाबाद और हिसार जिले किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। राज्य…


Haryana में पराली जलाने का बड़ा सच, जींद, फतेहाबाद और हिसार के किसानों की चुनौती, बाकी शहरों में कमी, पढ़िए पूरा सस्पेंस
Haryana में पराली जलाने का बड़ा सच, जींद, फतेहाबाद और हिसार के किसानों की चुनौती, बाकी शहरों में कमी, पढ़िए पूरा सस्पेंस
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Haryana में अगले दो वर्षों में पराली जलाने को शून्य करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जिंद, फतेहाबाद और हिसार जिले किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। राज्य में दर्ज की गई पराली जलाने की घटनाओं में आधे से अधिक मामले इसी तीन जिलों में सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि अम्बाला, फरीदाबाद, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और सिरसा के किसानों ने इस साल पराली जलाने की संख्या पिछले साल की तुलना में काफी कम की है।

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राज्य में केवल गुरुग्राम, महेन्द्रगढ़ और रेवाड़ी जिले पिछले छह वर्षों से पराली जलाने की घटनाओं से मुक्त रहे हैं। हालांकि, मेवात में यह प्रवृत्ति टूट गई है, जहाँ पिछले पांच वर्षों में कोई पराली जलाने की घटना नहीं हुई थी, लेकिन इस बार यहाँ एक मामला सामने आया है। इस वर्ष, राज्य में पराली जलाने की घटनाएँ पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत कम हुई हैं। जबकि पिछले साल 21 नवंबर तक 1,193 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज की गई थीं, इस साल यह संख्या अब तक 603 स्थानों तक पहुंची है।

सबसे अधिक पराली जलाने वाले जिले और आंकड़े

इस साल जिंद में सबसे अधिक 176 स्थानों पर पराली जली है। फतेहाबाद 84 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, हिसार में 65, और कैथल व सोनीपत में 58-58 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएँ सामने आई हैं। हरियाणा में 1,87,000 किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये की राशि दी जा रही है, जो 163.1 मिलियन एकड़ भूमि पर लागू है। किसानों को सब्सिडी पर 1,882 हैप्पी सीडर और सुपर सीडर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे वे बिना पराली हटाए सीधे गेहूं बो सकते हैं।

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पराली प्रबंधन के लिए नई पहल और लाभ

किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मुफ्त में डिकम्पोजर वेजिटेबल पाउडर भी प्रदान किया जा रहा है। पहले चरण में 75,000 एकड़ भूमि पर प्रति एकड़ एक पैकेट पाउडर वितरित किया गया है। यह डिकम्पोजर फसल अवशेष को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, फंगल रोग कम होते हैं और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 20 से 30 प्रतिशत तक घट जाता है। यह पहल किसानों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि उत्पादन में सुधार करने में मदद कर रही है।

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