Rewari News: हरियाणा में मंडियोंं में बाजार पहुंच रहा है। लेकिन मंडी में सरकारी खरीद शुरू हुई है। ऐसे मेंं किसानो को निजी व्यापारियों को कम दाम पर बाजरा बेचने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2025 में 2,750 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। ऐसे में किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार है।
बाजरे की कटाई तेजी से चल रही है। अब तक 50 प्रतिशत कटाई और 20 प्रतिशत थ्रेसिंग का काम पूरा हो गया है। इसके साथ ही मंडियों में बाजरे की आवक बढ़ने लगी है। समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को मंडियों में 500-600 रुपये प्रति क्विंटल कम पर निजी व्यापारियों को बाजरा 2 हजार से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचना पड़ रहा है।
करीब 1.40 लाख एकड़ क्षेत्र में बाजरे की बिजाई की गई है। मौसम अनुकूल रहने के कारण खेतों में फसल पक कर तैयार है और किसान कटाई के बाद जल्द उपज मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं। कई क्षेत्रों में कंबाइन मशीनों से कटाई का काम चल रहा है। कटाई के बाद थ्रेसिंग लगातार की जा रही है। किसानों की ओर से प्रवासी मजदूरों के सहारे बाजरे की कटाई की थ्रेसिंग कराई जा रही है। अगैती बाजरे की फसल की कटाई आगामी एक सप्ताह में अधिकांश पूरी हो जाएगी। 10 दिनों में थ्रेसिंग का कार्य भी पूरा हो जाएगा।
सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार : किसानों की सबसे बड़ी चिंता बाजरे की सरकारी खरीद को लेकर है। उम्मीद है कि जल्द सरकारी खरीद शुरू होगी। हालांकि खरीद की तारीख, खरीद केंद्रों और प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने से किसान परेशान हैं। जिन किसानों की फसल तैयार हो चुकी है, उनके सामने उसे रोककर रखने या मौजूदा भाव पर बेचने का विकल्प है।
फसल तैयार होने के बाद उसे लंबे समय तक घर पर रखना आसान नहीं है। नमी, भंडारण और मंडी तक ढुलाई का खर्च किसान को ही उठाना पड़ता है। सरकारी खरीद जल्द शुरू होने और खरीद प्रक्रिया स्पष्ट होने से किसानों को राहत मिल सकती है। बाजरे की कटाई तेज होने के साथ मंडियों में रोजाना आवक बढ़ रही है। व्यापारियों की ओर से फिलहाल 2100 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव दिए जा रहे हैं।













