शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

Punjab-Haryana High Court ने पेंशनर्स के लिए बड़ा फैसला सुनाया, बिना नोटिस की कटौती को बताया अवैध और अनुचित

Written by: Best24News

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Punjab-Haryana High Court ने पेंशनधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पेंशन से पूर्व सूचना, सहमति या नोटिस के बिना कटौती करना, चाहे वह "अधिक भुगतान"…


Punjab-Haryana High Court ने पेंशनर्स के लिए बड़ा फैसला सुनाया, बिना नोटिस की कटौती को बताया अवैध और अनुचित
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Punjab-Haryana High Court ने पेंशनधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पेंशन से पूर्व सूचना, सहमति या नोटिस के बिना कटौती करना, चाहे वह “अधिक भुगतान” या किसी अन्य कारण से क्यों न हो, न केवल अवैध है बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट ने इस संबंध में कड़ा रुख अपनाते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को आदेश दिया कि वह सभी एजेंसी बैंकों को स्पष्ट निर्देश जारी करे कि वे पेंशन खातों से एकतरफा या अचानक कटौती न करें।

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पेंशन कटौती का मामला

यह निर्णय कैथल म्युनिसिपल काउंसिल के सेवानिवृत्त कार्यकारी अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर आया। याचिकाकर्ता ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक ने उसके पेंशन खाते से बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के ₹6,63,688 काट लिए। बैंक ने दावा किया कि यह “अधिक पेंशन” की वसूली है, लेकिन याचिकाकर्ता को न तो किसी नोटिस के माध्यम से सूचना दी गई और न ही अपनी बात रखने का मौका मिला। न्यायमूर्ति हरप्रीत बृर ने सुनवाई के दौरान कहा कि पेंशन किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी की जीवन की अंतिम अवस्था में वित्तीय सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। अचानक कटौती न केवल उनकी योजनाओं में बाधा डालती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा और स्थिरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

बैंक की कार्रवाई पर कोर्ट की निंदा

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकांश पेंशनधारक अपनी दवा, चिकित्सा और दैनिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से पेंशन पर निर्भर रहते हैं, और बिना सूचना के इतनी बड़ी कटौती उनके जीवन स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। न्यायमूर्ति बृर ने कहा कि न तो पेंशनधारक को नोटिस दिया गया और न ही उसकी बात सुनी गई, जो सुनवाई का मौलिक अधिकार है। RBI के मास्टर सर्कुलर का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक केवल तब राशि सरकारी खजाने में लौटाने का उत्तरदायी है, जब गलती बैंक की हो; यदि गलती किसी सरकारी विभाग की हो, तो बैंक पेंशन खाते से एकतरफा कटौती नहीं कर सकता। कोर्ट ने बैंक की कार्रवाई को “मनमानी और पूरी तरह अवैध” करार दिया।

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कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए न केवल बैंक की भारी कटौती को अवैध घोषित किया, बल्कि बैंक और संबंधित विभाग को आदेश दिया कि वे पेंशनधारक को पूरी राशि वापस करें, साथ ही छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाएं। न्यायालय ने कहा कि पेंशनधारकों की वित्तीय और मानसिक सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासनिक निकायों की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे उनकी गरिमा और अधिकारों की रक्षा करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन में कोई परिवर्तन केवल सीमित परिस्थितियों में किया जा सकता है, जैसे स्पष्ट लिपिकीय त्रुटि, और ऐसे मामलों में भी पेंशनधारक को सूचना और सहमति देना अनिवार्य है।

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