शनिवार, 7 नवम्बर 2026

Panchkula: काली माता मंदिर के नए समय का खुलासा, जानिए कैसे बदल रही है सुबह और शाम की पूजा व्यवस्था

Written by: Best24News

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Panchkula: काली माता मंदिर के दर्शन समय में बदलाव कर दिया गया है। अब मंदिर सुबह 5 बजे से 8 बजे तक और शाम 5 बजे से 9 बजे तक खुला रहेगा।…


Panchkula: काली माता मंदिर के नए समय का खुलासा, जानिए कैसे बदल रही है सुबह और शाम की पूजा व्यवस्था
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Panchkula: काली माता मंदिर के दर्शन समय में बदलाव कर दिया गया है। अब मंदिर सुबह 5 बजे से 8 बजे तक और शाम 5 बजे से 9 बजे तक खुला रहेगा। इन समयों में ही भक्त मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर दिन में 8 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेगा। माता मंसा देवी श्राइन बोर्ड ने यह नया समय 20 दिसंबर तक लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम मंदिर में चल रहे निर्माण कार्यों को देखते हुए उठाया गया है।

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बोर्ड के सचिव पृथ्वी राज मित्तल ने बताया कि मंदिर कॉरिडोर का निर्माण तेजी से प्रगति कर रहा है। परियोजना के पहले चरण के तहत मंदिर के गुंबद का विध्वंस सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब मुख्य हॉल के विध्वंस का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके कारण दिन के समय मंदिर भक्तों के लिए बंद रहेगा। मंदिर के अंदर गर्भगृह की संरचना की सुरक्षा के लिए मोटे और बड़े लोहे के कोण लगाए जा चुके हैं ताकि मुख्य छत और दीवारों को सुरक्षित तरीके से तोड़ा जा सके।

मंदिर का भव्य रूप और प्राचीन इतिहास

प्राचीन काली माता मंदिर, जिसका निर्माण पांडव काल में हुआ था, अगले लगभग दो वर्षों में भव्य रूप में दिखाई देगा। माता मंसा देवी श्राइन बोर्ड लंबे समय से इस मंदिर को भव्य बनाने के लिए प्रयासरत है। गर्भगृह की सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के कोण यह सुनिश्चित करेंगे कि निर्माण कार्य के दौरान मंदिर की संरचना सुरक्षित रहे। आने वाले समय में मंदिर का यह रूप न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्थापत्य कला के लिहाज से भी अत्यंत आकर्षक होगा।

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भक्तों के लिए नई सुविधाएं और हॉल का निर्माण

काली माता मंदिर कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 4.3 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग मंदिर भवन के निर्माण के साथ-साथ अन्य सुविधाओं के लिए किया जाएगा। नए भव्य भवन में भजन हॉल, यज्ञशाला और दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए आवासीय सुविधाएं भी शामिल होंगी। भजन हॉल में भक्त सामूहिक भक्ति और कीर्तन कर सकेंगे, जबकि यज्ञशाला में धार्मिक अनुष्ठान और अग्निहोत्र जैसी क्रियाएं संपन्न होंगी। इससे भक्तों को धार्मिक अनुभव के साथ-साथ आरामदायक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

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