Metro Update: हरियाणा की सिटी फरीदाबाद के लोगों के लिए राहत की खबर है। मेट्रो के तुगलकाबाद-एरो सिटी रूट का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गुरुग्राम की दो घंटे की दूरी केवल एक घंटे में ही सिमट जाएगी।
गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच आने-जाने वाले लोगों की बहुत पुरानी मांग पूरी होने वाली है। चारों शहरों को तेज रफ्तार रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए नमो भारत RRTS कॉरिडोर की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। बता दें इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 15 हजार 746 करोड़ रुपये खर्च होने है। सबसे खुशी की बात यह है कि इस परियोजना पूरी होने के बाद NCR के इन प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगी।
रोजगार के बढेगे अवसर : बता दें निर्माण कार्य शुरू करने की संभावित समयसीमा दिसंबर 2026 के आसपास बताई जा रही है और परियोजना को लगभग 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन अंतिम समय सीमा मंजूरियों, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण की गति पर निर्भर करेगी। फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा जैसे बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच तेज कनेक्टिविटी बनने से रोजगार के अवसर भी बढेंगें।
घंटो का सफर होगा मिनटो में: गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा-ग्रेटर नोएडा कॉरिडोर को NCR की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। बता दे इस प्रस्तावित रूट का बड़ा हिस्सा हरियाणा में आएगा, जबकि इसका कुछ हिस्सा उत्तर प्रदेश में होगा। इस परियोजन की कुल लंबाई करीब 64 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 52 किलोमीटर हरियाणा में होगा। इस नेटवर्क में RRTS के साथ मेट्रो कनेक्टिविटी को जोड़ने की योजना है।
यह परियोजना NCR के लाखों लोगों के लिए फायदेमंद होगी। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट के निर्माण से सबसे ज्यादा राहत फरीदाबाद और गुरुग्राम के लिए सफर करने वाले लोगों को होगा।Metro Update
दरअसल, फरीदाबाद से रोजाना लाखों लोग गुरुग्राम का सफर करते हैं। फिलहाल, डायरेक्ट आने के लिए सड़क मार्ग ही एक विकल्प है। जिसके चलते यह रूट काफी लंबा है और लोगों को फरीदाबाद से गुरुग्राम पहुंचने के लिए करीब 2 घंटे से ज्यादा का समय लगता है।
ये होगा फायदा
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का निर्माण कार्य तय समय पर किया जाने की योजना बनाई जा रही है और फरीदाबाद के लोगों को गुरुग्राम जाने के लिए केंद्रीय सचिवालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वो सीधा तुगलकाबाद पहुंचक साकेट मेट्रो स्टेशन से सीधी मेट्रो ले सकेंगे। इस यात्रा में करीब एक घंटे का समय बच सकेगा।
यात्री RRTS के जरिए दूसरे शहर तक कम समय में पहुंच सकेंगे, जबकि इंटरचेंज के माध्यम से स्थानीय मेट्रो नेटवर्क का इस्तेमाल कर अपने गंतव्य तक जा सकेंगे. इस तरह लंबी दूरी और स्थानीय परिवहन के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जाएगी.














