गुरूवार, 5 नवम्बर 2026

Breaking News: दुनिया पर असर — क्यों है यह ड्रोन ‘दंग कर देने वाला’?

Written by: सुनील चौहान

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Breaking News: देशवासियों की बडी खुशी की खबर है। विदेशी ड्रोन पर निर्भर रहने के बजाय, भारत अपनी खुद की AI-ड्रोन तकनीक विकसित कर रहा है, जो रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में…


दुनिया पर असर — क्यों है यह ड्रोन ‘दंग कर देने वाला’?
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Breaking News: देशवासियों की बडी खुशी की खबर है। विदेशी ड्रोन पर निर्भर रहने के बजाय, भारत अपनी खुद की AI-ड्रोन तकनीक विकसित कर रहा है, जो रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। इस तरह की एडवांस ड्रोन टेक्नोलॉजी के साथ, भारत अन्य देशों को भी ड्रोन निर्यात कर सकता है, जिससे वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी पकड़ मजबूत होगी।

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3,000 किमी की रेंज और 30 घंटे की उड़ान क्षमता उसे सीमा पार मिशन, निगरानी और हमलों के लिए एक बहुत ही बहुमुखी प्लेटफॉर्म बनाती है। उच्च प्रदर्शन को कम लागत में देने की क्षमता मतलब भारत बड़ी संख्या में ऐसे ड्रोन बना सकता है, जिससे उसकी स्वअवधारणा और लड़ाकू क्षमता दोनों बढ़ेंगी।Breaking News

काल भैरव ड्रोन: बता दे कि यह ड्रोन Flying Wedge Defence & Aerospace (FWDA) द्वारा विकसित किया गया है, यानी यह पूरी तरह भारत में बना है। विदेशी ड्रोन जैसे अमेरिका का Predator ड्रोन इस्तेमाल करने की बजाय, भारत अब अपनी खुद की टेक्नोलॉजी पर भरोसा कर रहा है।

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काल भैरव की रेंज लगभग 3,000 किलोमीटर है (satcom-कनेक्शन के साथ)। इससे वह बहुत बड़े क्षेत्र में कार्य कर सकता है, जिससे उसकी रणनीतिक पहुंच बहुत मजबूत होती है। ड्रोन लगभग 30 घंटे तक उड़ान भर सकता है ISR (इंटेलिजेंस, सर्वेलांस, रिकॉन्सनेंस) मिशन के लिए। इसका ऑटोनॉमस फ्लाइट पाथिंग (AI का उपयोग कर अपनी उड़ान का पथ खुद चुनना) संभव है।

 

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बैटलफील्ड में निर्णय-लेने की क्षमता भी AI की मदद से है — जैसे खतरा आ गया तो वह अपने निर्णय खुद ले सकता है। स्वार्म (झुंड) ऑपरेशन में भाग ले सकता है — यानी कई ड्रोन मिलकर एक मिशन कर सकते हैं। युद्ध की रणनीति से दुश्मन की वायु रक्षा को चकमा देना आसान हो सकता है क्योंकि कई ड्रोन एक साथ हमला कर सकते हैं।

पेलोड लगभग 91 किलोग्राम है — इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर्स, मिसाइल या फ्यूल आदि शामिल हो सकते हैं। ड्रोन की छत (ceiling) लगभग 20,000 फीट है, जो रणनीतिक उड़ानों के लिए उपयुक्त है। इसमें शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग (STOL) की क्षमता है, जिससे सीमित रनवे पर भी उतारा या चढ़ाया जा सकता है। इसकी क्षमताएँ भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाती हैं — निगरानी मिशन (ISR), सटीक हमले, और स्वार्म हमले जैसी आधुनिक युद्ध तकनीकों में यह एक गेम-चेंजर बन सकता है।

 

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सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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