शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

Haryana News: अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट क्यो हुआ फेल? टिकली गांव में लगाए पौधे लगे सूखने

Written by: सुनील चौहान

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Haryana News: केंद्र सरकार का अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट, जिसे राजस्थान में रेगिस्तान बनने से रोकने के लिए बनाया गया था, सिर्फ़ कागज़ों पर ही हरियाली बढ़ा रहा है। यह प्रोजेक्ट अरावली…


Haryana News: अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट फेल? टिकली गांव में लगाए पौधे सूखने से उठे सवाल
Haryana News: अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट फेल? टिकली गांव में लगाए पौधे सूखने से उठे सवाल
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Haryana News: केंद्र सरकार का अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट, जिसे राजस्थान में रेगिस्तान बनने से रोकने के लिए बनाया गया था, सिर्फ़ कागज़ों पर ही हरियाली बढ़ा रहा है। यह प्रोजेक्ट अरावली पहाड़ियों में बसे टिकली गांव में शुरू किया गया था, जहाँ 50 पौधे लगाए गए थे। उनमें से दो पौधे भी अब सूखने की कगार पर हैं।

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पौधे लगाने के बाद, न तो स्थानीय वन विभाग और न ही केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने कोई फॉलो-अप किया। धीरे-धीरे, सभी पेड़ सूख गए। यहाँ तक कि पेड़ों की सुरक्षा के लिए लगाए गए गार्ड भी गायब हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल्ली में इस कार्यक्रम के तहत पौधे लगाए थे। प्रोजेक्ट के विकास की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन तब से कोई प्रगति नहीं हुई है।

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट के तहत पौधे इसी जगह लगाए गए थे

वन अधिकारियों का कहना है कि बजट के बिना यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सकता। ग्रीन वॉल बनाने के सपने को पूरा करने के लिए एक समर्पित बजट की ज़रूरत है। राज्य सरकारों के पास पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। पिछले कुछ सालों में दिल्ली सहित पूरे NCR क्षेत्र में अक्सर धूल भरी आंधियां आई हैं।

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माना जाता है कि इसके पीछे मुख्य कारण अरावली पहाड़ी क्षेत्र में हरियाली में रोज़ाना कमी आना है। शहरीकरण के बढ़ते दबाव ने अरावली रेंज को बहुत नुकसान पहुँचाया है। हज़ारों एकड़ ज़मीन का इस्तेमाल गैर-वन गतिविधियों के लिए किया गया है। अकेले साइबर सिटी इलाके में ही अरावली पहाड़ी क्षेत्र में दो हज़ार से ज़्यादा फार्म हैं।

कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए अरावली पहाड़ी क्षेत्र से कई सड़कें बनानी पड़ी हैं। नतीजतन, अरावली रेंज राजस्थान से आने वाली धूल भरी आंधियों को रोक नहीं पा रही है। इसे देखते हुए, केंद्र सरकार ने लगभग पाँच साल पहले अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट (दिल्ली से गुजरात तक 1400 किलोमीटर) की कल्पना की थी।

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यह प्रोजेक्ट 25 मार्च, 2023 को गुरुग्राम ज़िले के टिकली गांव में, जो अरावली पहाड़ियों में बसा है, शुरू किया गया था, जहाँ लगभग 50 पौधे लगाए गए थे। केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और हरियाणा के पूर्व पर्यावरण और वन मंत्री की मौजूदगी में इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था।

और भी पौधे लगाने की कोशिशों के बावजूद, पौधे ज़िंदा नहीं रह पा रहे हैं। पानी की कमी के कारण, सब कुछ जल्दी सूख गया। प्रोजेक्ट लॉन्च के समय यह कहा गया था कि आगे कैसे बढ़ना है, कौन से काम पूरे करने हैं, वगैरह के लिए एक फ्रेमवर्क जल्द ही बनाया जाएगा। ढाई साल बाद भी, इस प्लान के लिए कोई अलग बजट अलॉट नहीं किया गया है, और न ही काम का कोई डिटेल्ड प्लान बनाया गया है। बताया गया है कि सभी राज्यों से कहा गया है कि वे अपनी-अपनी योजनाओं के तहत पेड़ लगाकर और वॉटर बॉडीज़ को ठीक करके हरियाली बढ़ाने पर काम करें।

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट क्या है?

2030 तक, अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का मकसद दिल्ली से गुजरात तक 1400 किलोमीटर लंबी ग्रीन वॉल बनाना है, जिसका मतलब है कि पेड़ इस तरह से लगाए जाएंगे कि वे एक दीवार बन जाएं। इससे राजस्थान से आने वाले धूल भरे तूफानों का दिल्ली और पूरे NCR पर असर कम होगा। इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।

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प्लान के पहले फेज में आठ लाख हेक्टेयर ज़मीन पर पेड़ लगाए जाएंगे। प्लान 2030 तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में 64.5 लाख हेक्टेयर की ग्रीन बेल्ट बनाने का है। प्रोजेक्ट के तहत आने वाले इलाके में मौजूद सभी तालाबों को ठीक किया जाएगा।

तालाबों को ठीक करने से आसपास की हरियाली बढ़ेगी, जिससे ग्राउंडवॉटर लेवल बढ़ेगा। प्रोजेक्ट का दूसरा मकसद 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाना है। इस प्लान को लागू करने से लगभग 2.5 से 3.0 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की एक्स्ट्रा कैपेसिटी डेवलप होगी।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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