
धारूहेड़ा (Best24News): सोहना पलवल हाईवे पर अलवर बाइपास के निकट हो रहे जलभराव का मुद्दा अब ओर भी पेचिदा हो गया है। क्योंकि जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हरियाणा सरकार ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है। सरकार की ओर से कोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि विवादित रैंप का निर्माण किस विभाग या एजेंसी द्वारा कराया गया है, इसका कोई भी प्रामाणिक रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध नहीं है। साफ जाहिर कि धारूहेड़ा के पास कोई रैंप बनाया ही नही गया है।
अगली सुनवाई अब 18 नवंबर को होगी: बता देकि भिवाड़ी निवासी हवा सिंह व अन्य की ओर से दायर सिविल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने गत 19 अगस्त को हरियाणा सरकार से विवादित रैंप के निर्माण के कानूनी आधार और प्राधिकार पर रिपोर्ट मांगी थी। इसके अनुपालन में हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा हाई कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया गया है।
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निरीक्षण में सामने आई थी रैंप की स्थिति: अदालत द्वारा नियुक्त स्थानीय आयुक्त ने गत 4 जून को मौके का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के अनुसार रैंप की ऊंचाई करीब 3.05 फीट, चौड़ाई 13.50 मीटर और लंबाई लगभग 49 मीटर दर्ज की गई थी। मौके पर भिवाड़ी की तरफ करीब एक फीट पानी भी जमा मिला था।
रोज लगता है जाम, लोग परेशान: अलवर बाइपास पर हो रहे जलभराव से वाहन चालक तो परेशान है कि वही रोज जाम भी लगाता है। भिवाड़ी की कंपनियों की ओर से धडल्ले से काला व रसायन युक्त पानी छोडा जा रहा है। यहीं कारण है वह पानी अलवर बाइपास निकासी के अभाव मे जमा हो जाता है। अब सवाल यह है भिवाड़ी प्रशासन बिना बारिश छोडे जा रहे काले व रसायन युक्त पानी को लेकर कार्रवाई क्यों नहीं करती। अगर कंपनियों पर कार्रवाई तो ये जलभराव काफी हद तक कम हो सकता है।
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सरकार का मानना है कि केवल सड़क किनारे नादियां या नालियां बनाने से जलभराव का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए दोनों राज्यों की जल निकासी प्रणालियों, पानी के अंतिम निकास की क्षमता और पंपिंग व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक एकीकृत (Integrated) मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता है। अब 18 नवंबर की आगामी सुनवाई पर इस विवाद और संयुक्त समाधान की दिशा में आगे की कार्रवाई तय होगी।
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