बुधवार, 4 नवम्बर 2026

PM Kusum Yojana: किसानों के लिए खुशखबरी, सोलर पंप पर 90% तक पा सकते हैं सब्सिडी, इस तरह करें आवेदन

Written by: Best24News

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PM Kusum Yojana: प्रधानमंत्री कुसुम योजना में सोलर पंप पर 90 फीसद तक सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। जिसमें केंद्र सरकार…


PM Kusum Yojana: प्रधानमंत्री कुसुम योजना में सोलर पंप पर 90 फीसद तक सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार 30-30 फीसद की सब्सिडी प्रदान करेंगे और 30 फीसद तक ऋण की सुविधा बैंकों द्वारा दी जाएगी।

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प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पैनल की सुविधा दी गयी है। इस योजना के तहत सोलर पंप लगाने में आने वाली कुल लागत के 90 प्रतिशत खर्चे को सरकार द्वारा सब्सिडी के तौर पर वहन किया जायेगा। शेष 10 प्रतिशत लागत का भुगतान स्वयं किसानों द्वारा किया जाएगा।PM Kusum Yojana

सोलर पैनल से उत्पन्न होने वाली बिजली का उपयोग सिंचाई करने में किया जा सकेगा और अतिरिक्त बिजली को विधुत वितरण कंपनी (DISCOM) को बेच सकेंगे। जिससे सोलर पंप किसानों के लिए आय का साधन बनेगा। सोलर पैनल 25 वर्षों तक चलेगा और इसका रखरखाव भी बहुत ही आसानी से किया जा सकेगा।

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प्रधानमंत्री कुसुम योजना में सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार 30-30 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान करेंगे और 30 प्रतिशत तक ऋण की सुविधा बैंकों द्वारा दी जाएगी। प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ किसान, सहकारी समितियां, पंचायत, किसानों का समूह, किसान उत्पादक संगठन, जल उपभोगता एसोसिएशन आदि ले सकते हैं।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक भारत का स्थाई निवासी होना चाहिए। इस योजना के तहत 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए आवेदक द्वारा आवेदन किया जा सकता है।

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आवेदक द्वारा अपनी भूमि के अनुपात में 2 मेगावाट क्षमता या फिर वितरण निगम द्वारा अधिसूचित क्षमता (दोनों में से जो भी कम हो) के लिए आवेदन कर सकता है। प्रति मेगावाट के लिए लगभग 2 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी।PM Kusum Yojana

इस योजना के अंतर्गत स्वयं के निवेश से प्रोजेक्ट के लिए किसी भी प्रकार की वित्तीय योग्यता की आवश्यकता नहीं है। यदि आवेदक द्वारा किसी विकासकर्ता के माध्यम से प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है तो विकासकर्ता की नेटवर्थ 1 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट होनी अनिवार्य है।

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