हरियाणा सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत एलाइड हेल्थ प्रोफेशन से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को केवल प्रशिक्षित और प्रमाणित स्वास्थ्य विशेषज्ञों से ही उपचार और संबंधित सेवाएं मिलें। इससे गैर-प्रशिक्षित लोगों द्वारा इलाज करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
नई काउंसिल करेगी एलाइड हेल्थ सेवाओं की निगरानी
राज्य सरकार ने एलाइड एवं हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के कार्यों की निगरानी के लिए नई काउंसिल का गठन किया है। स्थायी व्यवस्था बनने तक यह काउंसिल अंतरिम रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभाएगी। काउंसिल का मुख्य कार्य स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पेशेवरों के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होगा।
इन स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर रहेगा विशेष फोकस
नई व्यवस्था के दायरे में मेडिकल लैब टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोलॉजी विशेषज्ञ, ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, एनेस्थीसिया तकनीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, डाइटिशियन, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट विशेषज्ञ और अन्य एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स शामिल होंगे। ये सभी डॉक्टरों के साथ मिलकर मरीजों के उपचार और जांच प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फर्जी और गैर-प्रशिक्षित लोगों पर होगी कार्रवाई
काउंसिल यह सुनिश्चित करेगी कि केवल योग्य और पंजीकृत पेशेवर ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें। यदि कोई व्यक्ति तय नियमों का उल्लंघन करता है या बिना आवश्यक योग्यता के सेवाएं देता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। गंभीर मामलों में संबंधित व्यक्ति का नाम अधिकृत रजिस्टर से हटाने जैसी कार्रवाई भी संभव होगी।
शिक्षा, प्रशिक्षण और परीक्षा प्रणाली होगी मजबूत
नई व्यवस्था के तहत एलाइड हेल्थ शिक्षा से जुड़े संस्थानों में पढ़ाई, प्रशिक्षण, शिक्षकों की योग्यता, शोध कार्य और बुनियादी सुविधाओं के मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही भविष्य में प्रवेश प्रक्रिया, काउंसलिंग और लाइसेंस से जुड़ी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि सभी विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए समान अवसर उपलब्ध हो सकें।इस पहल के लागू होने के बाद मरीजों को प्रशिक्षित और प्रमाणित विशेषज्ञों की सेवाएं मिलने की संभावना बढ़ेगी। जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता, फिजियोथेरेपी, पोषण संबंधी सलाह और अन्य तकनीकी स्वास्थ्य सेवाओं में भी बेहतर मानक देखने को मिलेंगे। इससे उपचार प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी और मरीजों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।














