शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

Breaking News: हरियाणा में पहली कक्षा में दाखिले के लिए बदले नियम

Written by: Best24News

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Breaking News: हरियाणा में स्कूल शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब राज्य के स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित…


Breaking News: हरियाणा में स्कूल शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब राज्य के स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा।

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सरकार का मानना है कि इस बदलाव से बच्चों की मानसिक और शारीरिक तैयारी बेहतर होगी और वे शिक्षा को अधिक प्रभावी तरीके से समझ पाएंगे। इससे पहले हरियाणा में पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 5 साल रखी गई थी, लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है।

पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा साढ़े 5 वर्ष तय की गई थी। सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए हर साल 6 महीने की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया था। इसी प्रक्रिया के तहत अब यह आयु सीमा बढ़ाकर 6 वर्ष कर दी गई है।

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Minimum Age for Class 1 Admission in Haryana Set at 6 Years, Rule to Take Effect from Academic Session 2026–27इस बदलाव का मतलब है कि पहले जहां 5 साल का बच्चा पहली कक्षा में दाखिला ले सकता था, वहीं अब बच्चे को कम से कम 6 साल का होना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे औपचारिक शिक्षा शुरू करने से पहले बुनियादी विकास के लिए पर्याप्त समय पा सकें।

 

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विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पहली कक्षा में प्रवेश के दौरान बच्चों की आयु की सही तरीके से जांच की जाए और नए नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को भी इस नियम की जानकारी देने के लिए कहा गया है, ताकि दाखिले की प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक और बच्चों के विकास के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया है। इसी नीति के तहत स्कूल शिक्षा के ढांचे को 5+3+3+4 फॉर्मेट में बदला गया है। इस संरचना के अनुसार बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है नई नीति के अनुसार बच्चे को पहली कक्षा में प्रवेश से पहले प्री-प्राइमरी स्तर पर पर्याप्त शिक्षा और विकास का अवसर मिलना चाहिए।

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यही कारण है कि पहली कक्षा में दाखिले के लिए 6 वर्ष की न्यूनतम आयु तय की गई है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय के आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बनाए गए हरियाणा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम 2011 का भी पालन किया जाए।

विशेष रूप से नियम 10 का उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रवेश की विस्तारित अवधि का प्रावधान है। इस नियम के अनुसार दाखिले की प्रक्रिया के दौरान 6 महीने की विस्तारित अवधि भी लागू होती है। इसलिए स्कूलों और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दाखिले के समय इन सभी नियमों का पालन किया जाए।

विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा: शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहली कक्षा में प्रवेश की उम्र 6 साल करने से बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कम उम्र में औपचारिक शिक्षा शुरू करने से कई बार बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव बन जाता है। नई व्यवस्था के तहत बच्चों को खेल, गतिविधियों और प्रारंभिक शिक्षा के माध्यम से सीखने का अधिक समय मिलेगा, जिससे वे स्कूल जीवन के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो पाएंगे।

हरियाणा में 1 अप्रैल 2026 से नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होगा और उसी के साथ पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष की न्यूनतम आयु का नियम भी लागू हो जाएगा। शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में इस नियम के बारे में स्कूलों और अभिभावकों को जागरूक करें। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।

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