शनिवार, 7 नवम्बर 2026

Breaking News: सम्मान से मौत के सफर पर हरीश राणा: एक परिवार के 13 साल लंबे संघर्ष का अंत

Written by: सुनील चौहान

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Breaking News: हरीश राणा के इच्छामृत्यु मामले में मंगलवार को एक बड़ा अपडेट सामने आया है। AIIMS के सूत्रों के अनुसार, मंगलवार से उन्हें पानी देना भी बंद कर दिया गया है।…


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Breaking News: हरीश राणा के इच्छामृत्यु मामले में मंगलवार को एक बड़ा अपडेट सामने आया है। AIIMS के सूत्रों के अनुसार, मंगलवार से उन्हें पानी देना भी बंद कर दिया गया है। बता दे कि डॉक्टरों की एक टीम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी दर्द के और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो। हालांकि फिलहाल, स्थिति गंभीर बनी हुई है।

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लाइफ सपोर्ट व फीडिंग सिस्टम को हटाया
बता दे कोर्ट के आदेश मिलने पर हरीश राणा को AIIMS में रैफर कर दिया गया था। यहां पर लाइफ सपोर्ट और फीडिंग सिस्टम को पहले ही हटा दिया गया था। इस बीच, एक मानवीय कदम के तौर पर, AIIMS प्रशासन ने उनके माता-पिता निर्मला देवी और अशोक राणा को पैलिएटिव केयर सेंटर के ही एक बगल वाले कमरे में रहने की अनुमति दे दी है। Breaking News

मंगलवार को डॉक्टरों की एक टीम यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी दर्द के हो सके। क्यो कि एक बेटे को 13 साल तक वेंटिलेटर पर जिंदा रखना और दिन-ब-दिन उसकी तकलीफ को देखना किसी भी इंसान के लिए एक अत्यंत कष्टदायक और असहनीय अनुभव होता है। माता पिता बेटे दर्द को सहन नहीं कर सके इसी लिए ये कमद उठाया जा रहा है।

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‘एक परिवार के 13 साल लंबे संघर्ष का अंत’
एक बेटे को 13 साल तक वेंटिलेटर पर जिंदा रखना और दिन-ब-दिन उसकी तकलीफ को देखना कष्टदायक और असहनीय है। इस फैसले ने एक पिता को मानसिक शांति और एक बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाई। इसी में उनकी असली जीत निहित है। ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ (passive euthanasia) के लिए अदालत से अनुमति प्राप्त करके, उन्होंने एक परिवार के 13 साल लंबे संघर्ष का अंत किया।

हरीश राणा के वकील ने इसको लेकर क्या कहा?
गाजियाबाद के हरीश राणा की ओर से, इच्छामृत्यु (euthanasia) जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे से जुड़े एक मामले में पैरवी करने वाले वकील मनीष जैन सोमवार को अपने पैतृक गांव, शामली के कंडेला पहुंचे। उनके प्रयास से ही सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जबकि माता पिता पहले भी पैसिव इच्छामृत्यु के आवेदन कर चुके थे लेकिन उनकी अपील रिजेक्ट कर दी गई थी। Breaking News

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उन्होंने कहा कि इस मामले में अदालत ने न केवल कानून को, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी महत्व दिया है। यह फैसला भविष्य में उन हज़ारों परिवारों के लिए राह खोलेगा, जिनके अपने लोग लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे हैं। सारे देश की निगाहे हरिश राणा पर टिकी हुई है लोग दुआ कर रहे है उसे बिना किसी दर्द के इच्छामृत्यु मिल सके। Breaking News

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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