शनिवार, 7 नवम्बर 2026

Breaking News: बाबा रामदेव का देसी घी टेस्ट में हुआ फेल, जानिए नकली और असली घी की कैसे करें पहचान ?

Written by: सुनील चौहान

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Breaking News: योग बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को एक बड़ा झटका तब लगा जब उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि कंपनी के देसी घी सैंपल टेस्ट ही फैल हो गया। टेस्ट के…


Breaking News: योग बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को एक बड़ा झटका तब लगा जब उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि कंपनी के देसी घी सैंपल टेस्ट ही फैल हो गया। टेस्ट के फेल होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पतंजलि कंपनी और दुकानदारों पर जुर्माना लगाया है। पूरे देश में इस सूचना को लेकर अफरा तफरी मच गई। अब सवाल यह है कहीं आप भी नकली घी तो नही खा रहे।

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बता दे कि खासकर बाबा रामदेव के बताए योग और उनके यहां मिलने वाले प्रोडक्ट्स पर लोग आंखें बंद कर के भरोसा करते हैं । हालांकि गुणत्तवा को भले ही इनके उत्पाद महंगे हो। लेकिन बुरा तब लगता है जब आपके विश्वास का कत्ल किया जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ है पतंजलि के देसी घी के साथ। अगर आप भी बाबा रामदेव का घी ले रहे है तो एक बार जरूर जाचं लेंं

 

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घी मिलावटी है या नहीं: इसका पता लगाने के लिए आप एक चम्मच घी गर्म कर लें। अगर घी तुरंत पिघल जाता है और इसका रंग बदलकर भूरा हो जाता है तो यह शुद्ध देशी घी है। अगर घी पीले रंग में बदलता है तो यह मिलावटी है।

भारतीय घरों में पुराने जमाने से देसी घी खाने पर काफी जोर दिया जाता है। खासतौर पर बच्चों की हड्डियों की मजबूती के लिए देसी घी खाना और इससे मालिश करना भी फायदेमंद माना जाता है।Breaking News

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हालांकि पहले के वक्त में घी ज्यादातर घरों में ही बनाया जाता था, इसलिए इसमें मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं रहती थी और बेफिक्र होकर आप इसे खा सकते थे। मगर मार्केट में मिलने वाले घी में मिलावट रहती है, जिसे फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है, लेकिन मिलावटी घी की पहचान करना इतना मुश्किल भी नहीं होता है।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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